मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि इस प्रकार के मान्यता प्राप्त ड्राइविंग सेंटर्स से गाड़ी चलाने की ट्रेनिंग लेने के बाद चालकों को ड्राइविंग लाइसेंस पाने में मदद मिलेगी। नोटिफिकेशन के अनुसार, मान्यता प्राप्त केंद्रों द्वारा दी गई मान्यता पांच साल के लिए लागू रहेगी और इसे रिन्यू किया जा सकेगा। हल्के मोटर वाहन चालक ड्राइविंग कोर्स की अवधि अधिकतम चार सप्ताह में 29 घंटे की होगी।
कोर्स को थ्योरी और प्रैक्टिस दो कैटेगरी में बांटा जाएगा। मध्यम और भारी मोटर वाहनों के लिए पाठ्यक्रम की अवधि छह सप्ताह में 38 घंटे की होगी। इस दौरान चालकों को सड़क पर दूसरे वाहन चालकों के साथ बेहतर व्यवहार और अनुशासन के बारे में जरूरी बातें भी पढ़ाई जायेंगी।
इस अधिसूचना में अन्य कई महत्वपूर्ण बिंदुएं लिस्ट की गई है।
- हाई क्वालिटी ट्रेनिंग के प्रावधान को सुनिश्चित करने के लिए इन मान्यता प्राप्त ड्राइवर ट्रेनिंग सेंटरों में सिमुलेटर के साथ-साथ एक डेडिकेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक होना चाहिए।
- ऐसे केंद्रों को मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत आवश्यकताओं के अनुसार रिमेडियल और रिफ्रेशर कोर्स का लाभ उठाने का विकल्प भी देना चाहिए।
- इन केंद्रों को अब इंडस्ट्री-स्पेसिफिक विशेष ट्रेनिंग प्रदान करने की अनुमति होगी। उदाहरण के लिए, ट्रक चालक ऐसे केंद्रों पर औपचारिक ट्रेनिंग ले सकते हैं, बशर्ते कि उनके पास इसके लिए प्रावधान हों।