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डीएल बनवाना होगा आसान: ड्राइवर ट्रेनिंग सेंटर्स में मिलेगा प्रशिक्षण, नए नियमों का एलान

Tue, 15 Jun 2021 06:59 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एक नए शोध से पता चला है कि भारत में सड़क हादसों से जुड़े मामलों की बड़ी वजहों में से एक यह है कि भारत में बड़ी संख्या में ड्राइवरों को ड्राइविंग का सही तरीका नहीं आता है। भारत सरकार ने इस समस्या के समाधान की तरह एक बड़ा कदम उठाया है। 
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Car driving - फोटो : For Reference Only
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विस्तार
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यह एक जगजाहिर तथ्य है कि सड़क सुरक्षा के मामले में भारत का रिकॉर्ड बहुत अच्छा नहीं कहा जा सकता। अब नए शोध से पता चला है कि इस समस्या की बड़ी वजहों में से एक यह भी है कि भारत में बड़ी संख्या में ड्राइवरों को ड्राइविंग का सही तरीका नहीं आता है। 
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भारत सरकार इस समस्या के समाधान की कोशिश कर रही है। और इस दिशा में अपने नए प्रयासों के तहत भारत में मान्यता प्राप्त ड्राइवर ट्रेनिंग सेंटर्स (प्रशिक्षण केंद्रों) के लिए नए नियमों का एलान किया है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने हाल ही में देश भर में मान्यता प्राप्त ड्राइवरों के प्रशिक्षण केंद्रों के लिए नए नियमों को अधिसूचित किया है। इन नए नियमों के जरिए यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी कि ऐसे केंद्र ड्राइविंग सीखने वाले लोगों को बेहतर ट्रेनिंग दें। MoRTH की अधिसूचना के अनुसार, ये नए नियम 1 जुलाई, 2021 से लागू होंगे। 

ड्राइविंग टेस्ट से मिलेगी छूट
हालांकि, मंत्रालय की इस नई अधिसूचना में एक और दिलचस्प जानकारी है। इसमें कहा गया है कि इन मान्यता प्राप्त ड्राइवर ट्रेनिंग सेंटर्स में सफलतापूर्वक टेस्ट पास करने वाले लोगों को उनके ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन करते समय ड्राइविंग टेस्ट से छूट दी जाएगी। यानी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाते वक्त उन्हें आरटीओ दफ्तार में ड्राइविंग टेस्ट नहीं देना पड़ेगा। बता दें कि भारत में ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन करते समय आवेदकों को क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) में ड्राइविंग टेस्ट देना होता है। 
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5 साल बाद कराना होगा रिन्यू

वीडियो प्रशिक्षण
मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि इस प्रकार के मान्यता प्राप्त ड्राइविंग सेंटर्स से गाड़ी चलाने की ट्रेनिंग लेने के बाद चालकों को ड्राइविंग लाइसेंस पाने में मदद मिलेगी। नोटिफिकेशन के अनुसार, मान्यता प्राप्त केंद्रों द्वारा दी गई मान्यता पांच साल के लिए लागू रहेगी और इसे रिन्यू किया जा सकेगा। हल्के मोटर वाहन चालक ड्राइविंग कोर्स की अवधि अधिकतम चार सप्ताह में 29 घंटे की होगी। 

कोर्स को थ्योरी और प्रैक्टिस दो कैटेगरी में बांटा जाएगा। मध्यम और भारी मोटर वाहनों के लिए पाठ्यक्रम की अवधि छह सप्ताह में 38 घंटे की होगी। इस दौरान चालकों को सड़क पर दूसरे वाहन चालकों के साथ बेहतर व्यवहार और अनुशासन के बारे में जरूरी बातें भी पढ़ाई जायेंगी।  
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मिलेंगे कई और फायदे

इस अधिसूचना में अन्य कई महत्वपूर्ण बिंदुएं लिस्ट की गई है।
  • हाई क्वालिटी ट्रेनिंग के प्रावधान को सुनिश्चित करने के लिए इन मान्यता प्राप्त ड्राइवर ट्रेनिंग सेंटरों में सिमुलेटर के साथ-साथ एक डेडिकेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक होना चाहिए। 
  • ऐसे केंद्रों को मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत आवश्यकताओं के अनुसार रिमेडियल और रिफ्रेशर कोर्स का लाभ उठाने का विकल्प भी देना चाहिए।
  • इन केंद्रों को अब इंडस्ट्री-स्पेसिफिक विशेष ट्रेनिंग प्रदान करने की अनुमति होगी। उदाहरण के लिए, ट्रक चालक ऐसे केंद्रों पर औपचारिक ट्रेनिंग ले सकते हैं, बशर्ते कि उनके पास इसके लिए प्रावधान हों।
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