केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा को बताया कि उत्तर प्रदेश में 1.39 लाख इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर्ड हैं, वहीं दिल्ली में यह संख्या 75,600 है। हालांकि इनमें से सबसे ज्यादा वाहन ई-रिक्शा और ई-कार्ट हैं। मार्च 2015 में संसद में एक कानून पास करके सरकार ने इन्हें मोटर वाहनों की श्रेणी में शामिल करने को लेकर मान्यता दी थी।
उत्तर प्रदेश और दिल्ली के बाद तीसरा नंबर कर्नाटक और चौथा नंबर महाराष्ट्र का है। वहीं उत्तर पूर्वी राज्यों में असम में सबसे ज्यादा 15,192 इलेक्ट्रिक वाहन हैं। हालांकि देशभर में इलेक्ट्रिक वाहनों की यह संख्या आधिकारिक आंकड़ों से कहीं ज्यादा हो सकती है। इसकी वजह है कि पूरे देश में बिना रजिस्ट्रेशन के भी ई-रिक्शा चल रहे हैं। अगस्त 2016 में परिवहन मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन निकाला था, जिसमें सामान या यात्री ढोने वाले ई-रिक्शा और ई-कार्ट्स के लिए कमर्शियल परमिट को जरूरी किया गया था।
वहीं पिछले साल अक्टूबर 2018 में मंत्रालय ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए एक और नोटिफिकेशन जारी किया था, जिसमें बैटरी से चलने वाले कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों और इथेनॉल और मिथेनॉल से चलने वाले वाहनों को परमिट लेने से छूट दी गई थी।
साथ ही केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने देश में इलेक्ट्रिक वाहनों और इको-फ्रैंडली को बढ़ावा देने के लिये रजिस्ट्रेशन फीस में छूट देने का भी प्रस्ताव दिया है। पांच जुलाई को संसद में पेश बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी की दरें 12 प्रतिशत के घटा कर पांच प्रतिशत करने इलेक्ट्रिक कारों के लिए खरीदे जाने वाले लोन की ब्याज दरों पर इनकम टैक्स में डेढ़ लाख रुपये तक की छूट देने का एलान किया था।