बहुत ही साधारण परिवार से ताल्लुक रखनेवाली वाली दुती चंद ने खेल की दुनिया में बुलंदियों को छूआ। अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स में उनकी उपलब्धियों के बाद, दुती चंद देश में एक घरेलू नाम बन गईं। दो साल पहले उन्होंने खुद के लिए एक बीएमडब्ल्यू कार खरीदी थी। उन्होंने कथित तौर पर इस कार को खरीदने के लिए पुरस्कारों में पैसों का इस्तेमाल किया था।
हाल ही में, उन्होंने फेसबुक पर ओडिया भाषा में एक संदेश के साथ कार की तस्वीरें पोस्ट की, जिससे पता चला कि वह इसे क्यों बेच रही हैं। हालांकि फेसबुक पोस्ट के मुताबिक उनके पास ओलंपिक के प्रशिक्षण के लिए संसाधन नहीं थे, इसलिए वे कार बेच रही थीं। लेकिन समाचार एजेंसी एएनआई ने बाद में उनके हवाले से कहा कि कार की उच्च रखरखाव में होने वाला खर्च उनके लिए एक चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा, "अपनी बीएमडब्ल्यू कार को बेचने के लिए मैं सोशल मीडिया पर लिखा था। मेरे पास लक्जरी कार के रखरखाव के लिए संसाधन नहीं हैं, हालांकि मैं उनसे प्यार करती हूं। मैं इस कार का इस्तेमाल नहीं कर पा रही हूं और इसका बड़ा खर्च मेरे हिस्से है।" "मैंने कभी यह नहीं कहा कि मैं अपने प्रशिक्षण के पैसों के लिए इसे बेच रही हूं।"
ऐसे समय में जब लग्जरी वाहन खरीदना बहुत से लोगों के लिए एक व्यवहार्य विकल्प बन गया है, क्योंकि बाजार में फाइनेंस ऑप्शंस की भरमार के कारण महंगे वाहन देश में आमतौर पर दिख जाते हैं। जबकि इनमें से अधिकांश लक्जरी कार निर्माता उचित रखरखाव पैकेज की भी पेशकश करते हैं, लेकिन यह कई लोगों की जेब पर भारी पड़ते हैं।
दुती चंद के मामले में, यह भी इस तथ्य सामने आया है कि उन्होंने राज्य सरकार और प्रायोजकों द्वारा दिए गए अपने सभी आवंटित धन को प्रशिक्षण के लिए खर्च कर दिया है, क्योंकि कोविद-19 के कारण टोक्यो ओलंपिक के आयोजन की तारीख अगले साल तक के लिए बढ़ा दी गई है। उन्होंने कहा, "ऐसा नहीं है कि मैं संसाधनों की कमी या अभाव में रहती हूं, लेकिन कार बेचने से जहां एक तरफ मुझे थोड़ी राहत मिल सकती है और वहीं दूसरी तरफ KIIT और ओडिशा सरकार पर बोझ नहीं पड़ेगा जो इस कठिन समय में मेरी मदद कर रहे हैं।"
इससे यह बात भी उभर कर सामने आती है कि लोग अनिश्चितताओं के मौजूदा समय में पैसों के कारण नए वाहनों की खरीद को टाल सकते हैं।