Covid 19 (कोरोना वायरस) महामारी के प्रकोप के चलते देशभर में 25 मार्च से लॉकडाउन जारी है जो अब तक के निर्देशों के मुताबिक 17 मई तक लागू रहेगा। लेकिन सरकार ने कुछ शर्तों के साथ कुछ उद्योगों में काम शुरू करने की अनुमति दी है। जिसके बाद ऑटोमोबाइल कंपनियों ने भी अपने शोरूम और डीलरशिप खोल दिए हैं। लेकिन खुदरा बिक्री के शुरुआती कुछ दिन ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए काफी डरावने रहे हैं। ग्राहक अपनी कार की बुकिंग को कैंसिल कराकर अपनी नगदी वापस ले रहे हैं।
ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक ऑटोमोबाइल उद्योग में कई स्रोतों के अनुसार, पहले कुछ दिनों में ग्राहकों की प्रतिक्रियाएं थोड़ी डराने वाली हैं। देशव्यापी लॉकडाउन होने से पहले जिन ग्राहकों ने कार की पूरी कीमत का भुगतान कर दिया था और गाड़ी की सिर्फ डिलीवरी होनी बाकी थी, केवल उन लेनदेन को छोड़कर ज्यादातर ग्राहक नई कार खरीदने से बच रहे हैं और शोरूम में इक्का-दुक्का लोग ही पहुंच रहे हैं।
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एक पैसेंजर कार डीलर ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि "शोरूम के फिर खुल जाने पर भी लोगों की बहुत ठंडी प्रतिक्रिया मिल रही है। बुकिंग कैंसिल करने की दर को देखने से लगता है कि अगले कुछ दिनों के बाद ज्यादा डिलीवरी होने वाली नहीं हैं और हम खुद पर एक नया लॉकडाउन लागू कर सकते हैं।"
मार्च में लॉकडाउन लागू होने से पहले कई वाहनों के लिए अच्छी खासी संख्या में ग्राहकों की कंफर्म बुकिंग हुई थी। बड़ी संख्या में ग्राहक Hyundai Creta (ह्यूंदै क्रेटा) और Kia Seltos (किआ सेल्टोस) की बुकिंग कराने आए थे। इन न्यू जेनरेशन के कॉम्पैक्ट एसयूवी के लुक की शानदार डिजाइन और टेक्नोलॉजी पर लोग फिदा हैं। इसके अलावा ब्रिटिश ब्रांड MG Motors (एमजी मोटर्स) को अपने डेब्यू मॉडल Hector (हेक्टर) के लिए अच्छी-खासी बुकिंग मिली थी, जो बाजार में काफी अच्छा प्रदर्शन कर रही है।
ऑटोमोबाइल कंपनियों की घोषणा के मुताबिक Kia Motors की Seltos कार की 50,000 बुकिंग की गई थी। MG Motors की Hector की 20,000 यूनिट्स की बुकिंग हुई थी और Hyundai Motor India की Creta की 20,000 यूनिट्स की बुकिंग की गई थी।
हालांकि, कम खर्च करने की एक नई लहर सभी को बचत को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाने और नई खरीद से बचने के लिए मजबूर कर रही है। हालांकि इस स्थिति में संभवतः कर्ज पर आधारित एक पूरी श्रृंख्ला प्रभावित हो सकती है। भारत में नई कार की बिक्री का 70 फीसदी से अधिक वित्त बैकिंग और आकर्षक ईएमआई सौदों के साथ होता है, जो ओईएम-समर्थित फाइनेंस कंपनियों या निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से आते हैं। नए वाहनों के समग्र पोर्टफोलियो को फाइनेंस का भारी समर्थन हासिल है जिसकी वजह से ज्यादातर खरीद हो पाती है।
एक कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "अगर 70 फीसदी से ज्यादा नई कारें फाइनेंस पर बेची जाती हैं, जहां समय पर ईएमआई नहीं भरने की स्थिति में भारी पेनाल्टी भरना पड़ता है, तो अधिकांश ग्राहक अभी उनसे बच रहे हैं। Covid-19 के इन समय में ग्राहक किसी भी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के खिलाफ हैं, जब कमाई कम हो रही है और नौकरी जाने का खतरा बढ़ा हुआ है।"
पैसेंजर वाहन पोर्टफोलियो में सेगमेंट की सबसे बड़ी कंपनी Maruti Suzuki (मारुति सुजुकी) और दक्षिण कोरियाई Hyundai Motors (ह्यूंदै मोटर्स) समेत कुछ अन्य कंपनियों के पूरे भारत में इस सप्ताह लगभग 1000 डीलरशिप का संचालन शुरू हो गया है। वे खुदरा बिक्री को बढ़ाना चाह रहे थे, लेकिन ग्राहकों की प्रतिक्रिया ने कई डीलरों को उदास और चकित कर दिया है।
डीलर समुदाय को उम्मीद है कि लॉकडाउन 3.0 खत्म होने के बाद एक-राज्य से दूसरे राज्य में लोगों की आवाजाही बढ़ेगी तो इसके साथ ही आने वाले हफ्तों में ग्राहकों के संख्या भी बढ़ेगी। यह लोगों के मन में कुछ सकारात्मक बदलाव ला सकता है जो संक्रमण से बचने के लिए सैनेटाइज्ड और स्वच्छ व्यक्तिगत वाहन की तलाश में होंगे।
पूरे भारत में 7,000 से अधिक पैसेंजर वाहन आउटलेट हैं, जिसमें मारुति सुजुकी नेटवर्क के देश में 1,964 कस्बों और शहरों में 3,086 शोरूम शामिल हैं। दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे प्रमुख बाजार जिनसे भारत का आधे से अधिक पैसेंजर वाहन बाजार बनता है, वे रेड जोन में हैं और फिलहाल बंद हैं। ज्यादातर शोरूम को अभी तक संबंधित सरकारों से मंजूरी नहीं मिली है और उनके परिचालन में कुछ और समय लगेगा।