लाइवमिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश के कई डीलरशिप ने अपने बिना बिके बीएस4 वाहनों को पंजीकृत किया है और अब वे पूर्व-स्वामित्व (सेकंड हैंड) सेगमेंट में बिक्री पर नजर गड़ाए हुए हैं। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि कई डीलरशिप के अधिकारियों ने बताया कि खास तौर पर दोपहिया वाहनों के मामले में ऐसा किया जा रहा है क्योंकि इस श्रेणी में बीएस4 वाहनों का स्टॉक कारों और कमर्शियल गाड़ियों की तुलना में बहुत ज्यादा है।
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सुप्रीम कोर्ट ने सभी बीएस4 वाहनों की बिक्री के लिए 1 अप्रैल की समय सीमा तय की थी। मार्च में कुछ राहत मिली जब शीर्ष अदालत ने देशव्यापी लॉकडाउन खत्म होने के बाद डीलरों को अपने बीएस4 स्टॉक का 10 फीसदी बेचने की अनुमति दी। लेकिन लाइवमिंट की रिपोर्ट का दावा है कि कई डीलर अनिश्चित्ता के भरोसे बैठे रहने को तैयार नहीं हैं।
डीलर भी अच्छी तरह से जानते हैं कि पूर्व-स्वामित्व के रूप में रजिस्टर्ड नए बीएस4 वाहनों के लिए बहुत कम कीमत की मांग की जा सकेगी। इसमें एक बार फिर से रोड टैक्स देना होगा और कुछ राज्यों में ट्रांसफर फीस भी शामिल होगा। यह खर्च डीलरों के बोझ को बढ़ाएगा। लेकिन इसके बावजूद कई डीलर अपने बचे हुए स्टॉक को बेचने के लिए अभी भी यह तरीका अपनाएंगे, इसकी बजाए कि ऐसे वाहनों को बेचा ही न जाए।
BS6 ईंधन और BS6 उत्सर्जन मानक वाले इंजन को लागू करने की एक मुख्य वजह वाहनों से होने वाले प्रदूषण के स्तर को नीचे लाना है। बीएस6 ईंधन उत्सर्जन वाले इंजनों को तैयार करने के लिए प्रौद्योगिकी का विकास, हालांकि, एक महंगा प्रस्ताव रहा है और बीएस4 वाहनों के बिना बिके हुए स्टॉक का क्या होता है, यह सवाल कई ओईएम और डीलरशिप के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। हालांकि कई ऐसे वाहनों पर छूट की पेशकश की गई थी, लेकिन लॉकडाउन के कारण शोरूम बंद हो गए थे और वाहनों की मांग में ऐतिहासिक गिरावट देखी गई।