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BH Series Number Plate: वाहन चालकों को मिलने शुरू हुए भारत सीरीज के रजिस्ट्रेशन नंबर, ऐसे कर सकते हैं अप्लाई

Mon, 01 Nov 2021 01:28 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के सेक्शन 47 के तहत दूसरे राज्य में वाहन के इस्तेमाल के लिए 12 महीनों के भीतर फिर से रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है। जिसके लिए वाहन मालिक को पुराने राज्य के आरटीओ से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना पड़ता है और नए राज्य में रोड टैक्स का भुगतान करने के बाद अपने स्थानीय आरटीओ में टैक्स रिफंड के लिए आवेदन देना पड़ता था...
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देश का पहला BH-Series नंबर देते महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री सतेज पाटिल - फोटो : Satej D Patil/ Twitter
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विस्तार
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सरकार ने कुछ समय पहले एलान किया था कि एक राज्य से दूसरे राज्य में शिफ्ट होते समय वाहन मालिकों को वाहनों का दोबारा पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि उन्हें खास भारत (BH-Series) सीरीज की नंबर प्लेट मिलेंगी। वहीं ये नंबर प्लेट पूरे देश में लागू होंगी। यह सुविधा रक्षा कर्मियों के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों के अलावा निजी संस्थान से जुड़े कर्मियों के लिए भी लागू होगी। वहीं अब सरकार ने भारत सीरीज के रजिस्ट्रेशन नंबर जारी करना शुरू कर दिया है। हाल ही में महाराष्ट्र में इस सीरीज का पहला नंबर जारी किया गया, जो केंद्र सरकार के एक कर्मचारी को मिला है। अगर आप भी किसी दूसरे राज्य में शिफ्ट हो रहे हैं, तो जानिए कैसे आप बीएच-सीरीज का नंबर अपने वाहन के लिए ले सकते हैं।

क्या है आरसी ट्रांसफर की पुरानी प्रक्रिया

सरकार के भारत सीरीज रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को शुरू करने से पहले वाहन मालिकों को दूसरे राज्य में वाहन ट्रांसफर कराने के लिए कई मुश्किल प्रक्रियाओं से गुजरना होता था। मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के सेक्शन 47 के तहत दूसरे राज्य में वाहन के इस्तेमाल के लिए 12 महीनों के भीतर फिर से रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है। जिसके लिए वाहन मालिक को पुराने राज्य के आरटीओ से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना पड़ता है और नए राज्य में रोड टैक्स का भुगतान करने के बाद अपने स्थानीय आरटीओ में टैक्स रिफंड के लिए आवेदन देना पड़ता था। राज्य बदलने पर यह प्रक्रिया फिर से दोहरानी पड़ती थी। लेकिन बीएच-सीरीज आने के बाद इन झंझटों से मुक्ति मिल गई है।

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किन लोगों के लिए उपलब्ध है ये सीरीज

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के मुताबिक यह सुविधा रक्षा कर्मियों के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक आधार पर उपलब्ध होगी। नया नियम सरकारी सार्वजनिक उपक्रमों और निजी क्षेत्र की वाहन कंपनियों के लिए भी प्रस्तावित किया गया है। केंद्र सरकार, राज्य सरकार, रक्षा और निजी संस्थान से जुड़े कर्मचारी जिनके चार से ज्यादा राज्यों या केंद्र प्रशासित प्रदेशों में दफ्तर हैं, वे सभी कर्मचारी अब अपने वाहन के लिए भारत सीरीज रजिस्ट्रेशन नंबर ले सकते हैं। अधिसूचना के मुताबिक यह वाहन चालक पर निर्भर करेगा कि वह भारत सीरीज का रजिस्ट्रेशन लेना चाहता है या नहीं। अगर आप नई गाड़ी खरीदते हैं तो यह अनिवार्य नहीं है कि आप BH सीरीज में ही रजिस्ट्रेशन कराएं।

क्या होगा बीएच-सीरीज की नंबर प्लेट का फॉर्मेट

  • YY: पहले रजिस्ट्रेशन का साल
  • BH: भारत सीरीज का कोड
  • ####: 0000 से 9999 में से कोई चार नंबर
  • XX: अल्फाबेट्स (AA से ZZ तक)
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कैसे करें आवेदन

  • अगर आप उपयुक्त योग्यता रखते हैं, तो आप आवेदन के पात्र हैं। अगर आपका अपना कोई व्यापार है या फिर किसी प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं, तो आप भी आवेदन कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए चार से ज्यादा राज्यों या केंद्र प्रशासित प्रदेशों में दफ्तर होने जरूरी हैं।
  • आवेदन करने के लिए आपको सडक परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की वेबसाइट पर जाकर Vahan पोर्टल पर जाना होगा।
  • नए वाहन की खरीद के दौरान भी डीलर जरिए बीएच-सीरीज का नंबर लिया जा सकता है। इसके लिए वाहन मालिक को वाहन पोर्टल पर उपलब्ध फॉर्म 20 और फॉर्म 60 भरना होगा।
  • प्राइवेट सेक्टर से जुड़े कर्मियों को एंप्लॉयमेंट सर्टिफिकेट के साथ एंप्लॉय आईडी इन फॉर्म्स के साथ जमा कराना होगा।

भारत सीरीज के लिए रोड टैक्स कैलकुलेशन

  • बीएच सीरीज नंबर प्लेट वाले वाहनों को खरीद के समय 15 साल के रोड टैक्स का भुगतान करने के बजाय दो साल के लिए और उसके बाद हर दो साल में रोड टैक्स का भुगतान करना होगा। प्रथम पंजीकरण की तिथि से 14वें वर्ष के बाद मोटर व्हीकल टैक्स हर साल लगाया जाएगा जो कि पूर्व में लगने वाले टैक्स का आधा होगा।
  • 10 लाख रुपये से कम कीमत वाले वाहनों पर 8 फीसदी टैक्स लगेगा। जबकि 10 से 20 लाख रुपये के बीच की कीमत वाले वाहनों पर 10 फीसदी टैक्स लगाया जाएगा। 20 लाख रुपये से ज्यादा कीमत वाले वाहनों पर 12 फीसदी टैक्स लगेगा।  
  • डीजल से चलने वाले वाहनों से नियमित राशि के अलावा 2 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा। वहीं इलेक्ट्रिक वाहनों से निर्धारित राशि से 2 फीसदी कम टैक्स वसूला जाएगा। 
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