ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के संगठन सियाम ने कहा है कि देश में ईंधन की बढ़ती कीमतों से वाहन उद्योग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और इससे वाहनों की मांग में कमी आएगी। सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) ने सरकार को मांग आधारित नीति के बजाय फिटनेस आधारित स्क्रैप नीति का भी सुझाव दिया है।
सियाम के अध्यक्ष केनिची आयुकावा ने बुधवार को ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों से बातचीत में कहा, " दुर्भाग्य से, ईंधन की कीमतें बढ़ने से हमारे उद्योग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। हमें नहीं पता कि इस तरह की स्थिति कब तक चलेगी। लेकिन हम उम्मीद करते हैं कि ईंधन की कीमतें जल्द से जल्द कम होंगी।"
उन्होंने कई राज्यों में पेट्रोल के दाम 100 रुपये प्रति लीटर और डीजल के दाम 90 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंचने पर कहा कि इससे वाहन उद्योग प्रभावित होगा।
केनिची ने कहा, "हमें बाजार में मांग को ध्यान से देखना होगा। क्योंकि ईंधन की बढ़ती कीमतों से लोग निजी वाहन का इस्तेमाल करने से बचेंगे। यह हमारे लिए बड़ी चिंता का विषय हैं।"
Petrol Pump
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यह कहते हुए कि सियाम यह अनुमान नहीं लगा सकता कि बिक्री में कितनी गिरावट होगी, उन्होंने कहा, "ऐतिहासिक रूप से, जब भी ईंधन की कीमत में वृद्धि होती है तो मांग में मंदी होती है।"
आयुकावा ने आगे कहा कि, "हमें देखना होगा कि यह कैसा चल रहा है।" साथ ही उन्होंने सहमति व्यक्त की है कि डीजल की कीमतों में वृद्धि के साथ माल की परिवहन लागत भी बढ़ेगी और इस प्रकार "मुद्रास्फीति में तेजी" आएगी।
उन्होंने सरकार द्वारा इस साल मार्च में घोषित वाहन कबाड़ नीति में वाहनों की 'फिटनेस' पर ध्यान देने का आग्रह किया।
पेट्रोल-डीजल की कीमत
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सियाम का विचार है कि "सड़क पर सुरक्षा और पर्यावरण के लिए वाहन की फिटनेस महत्वपूर्ण है। वाहन सड़क पर चलने योग्य होने चाहिए। इसलिए हमें उपयोग में आने वाले वाहनों का नियमित परीक्षण करना चाहिए। यदि ऐसे वाहन ठीक नहीं पाए जाते हैं, तो इन वाहनों को नवीनीकरण का पर्याप्त अवसर दिया जाना चाहिए, यदि यह अभी भी ठीक नहीं है, तो इसे रद्द कर दिया जाना चाहिए।"