1988 के वर्तमान मोटर वाहन अधिनियम के तहत, 16 से 18 वर्षीय बच्चों को केवल 50 सीसी इंजन तक संचालित दोपहिया वाहनों की सवारी करने की इजाजत है। हालांकि, भारत में उपलब्ध सबसे छोटा इंजन विस्थापन 100cc है। मंत्रालय का कहना है कि इस कदम के पीछे का कारण गतिशील और उग्र ड्राइविंग में शामिल युवाओं के खतरे को खत्म करना है।
अभी तक गियरलैस इलेक्ट्रिक स्कूटर के लिए लाइसेंस प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं थी ।क्योंकि इन स्कूटरों को छूट दी गई थी। सरकार ऐसे स्कूटर को 'हल्के दो-पहिया संचालित वाहन' के रूप में वर्गीकृत कर रही है और इसलिए उनका उपयोग करने के लिए एक ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य होगा।इन दोपहिया वाहनों पर वैध लाइसेंस प्लेटों का भी प्रवाधान रखा गया है।
हाल ही में परिवहन मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन कर यह व्यवस्था भी लागू की थी कि देश के किसी भी हिस्से में वाहन चलाते समय आपको वाहन पंजीयन प्रमाण पत्र और प्रदूषण प्रमाण पत्र साथ रखने की जरूरत नहीं है। इन दस्तावेज की डिजीटल कॉपी मोबाइल एप के डिजी लॉकर में रख सकते है, ताकि जरूरत पड़ने पर उसे दिखाया जा सके।