फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) (फाडा) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर कंपनसेशन सेस के बैलेंस के निपटारे को लेकर मदद मांगी है।
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) (फाडा) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर कंपनसेशन सेस के बैलेंस के निपटारे को लेकर मदद मांगी है।
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जीएसटी 2.0 से जुड़ी चिंता
FADA ने कहा कि जीएसटी 2.0 लागू होने के बाद पुराने कंपनसेशन सेस का प्रावधान खत्म हो गया है। लेकिन आज भी डीलर्स के पास अपने इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर्स में बड़ी मात्रा में वैध सेस बकाया पड़ा हुआ है। मौजूदा कानून के तहत, अब जब नया सेस लागू नहीं होगा तो ये बैलेंस CGST/SGST/IGST के खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
MSME डीलर्स पर कैश फ्लो का संकट
फाडा के अध्यक्ष सीएस विग्नेश्वर ने कहा कि अगर इस बकाया को समायोजित करने का कोई रास्ता नहीं निकला, तो यह क्रेडिट बेकार हो जाएगा। इससे MSME (एमएसएमई) डीलर्स पर भारी असर पड़ेगा और उनके वर्किंग कैपिटल पर बड़ा झटका लगेगा।
जीएसटी काउंसिल का हालिया फैसला
56वीं जीएसटी काउंसिल मीटिंग में मोटर व्हीकल्स पर लगने वाला कंपनसेशन सेस जीएसटी दरों में मिला दिया गया है। इसका मतलब है कि अब आगे से कोई नया सेस लागू नहीं होगा।
FADA की मांग
विग्नेश्वर ने मांग की कि 21 सितंबर तक डीलर्स के पास जितना कंपनसेशन सेस क्रेडिट लेजर में पड़ा है, उसे IGST/CGST क्रेडिट लेजर में ट्रांसफर कर दिया जाए। इसके बाद डीलर्स इसे नियमित जीएसटी लायबिलिटी चुकाने में इस्तेमाल कर सकें।
त्योहारों से पहले राहत की अपील
विग्नेश्वर ने कहा, "हमारे मेंबर्स इस मुद्दे को लेकर बेहद चिंतित हैं, खासकर जब हम फेस्टिव सीजन में प्रवेश कर रहे हैं। इसलिए हम आपसे (वित्त मंत्री से) अनुरोध करते हैं कि इस मुद्दे को प्राथमिकता दें और सकारात्मक जवाब दें।"
फाडा ने कहा कि यह डीलर्स के लिए एक अहम और तात्कालिक मुद्दा है, इसलिए इस पर जल्द से जल्द चर्चा के लिए वे सरकार से मिलने का वक्त चाहते हैं।