केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में एथर एनर्जी के सह-संस्थापक एवं सीईओ तरुण मेहता के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस दौरान इन्होंने वाहन इलेक्ट्रॉनिक्स पर चर्चा की। कहा कि सरकार चाहती है भविष्य की इलेक्ट्रिक गाड़ियां न केवल पर्यावरण के अनुकूल हो, बलकि उनमें लगा हर सेंसर और चिप मेड इन इंडिया हो।
मंत्री ने सोशल मीडिया पर इस बात पर जोर दिया कि भारत का सेमीकंडक्टर मिशन कैसे इंटेलिजेंट वाहन सिस्टम को मजबूत करेगा। इससे ड्राइविंग स्मार्ट होगी, क्योंकि स्वदेशी चिप्स की मदद से गाड़ियां बेहतर तरीके से खतरों को भांप सकेंगी। साथ ही इनका लक्ष्स एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स के जरिए रियल-टाइम रोड सेफ्टी फीचर्स को हर घर तक पहुंचाना है। इसलिए भारत अब एडवांस्ड मोबिलिटी के लिए अपनी घरेलू सेमीकंडक्टर क्षमताएं विकसित कर रहा है।
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बजट 2.0 और एथर की बिल्ड इन भारत पहल
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब सरकार ने ISM 2.0 के लिए एक हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। एथर एनर्जी पहले ही वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के साथ हाथ मिला चुकी है। एथर बिल्ड इन भारत पहल के तहत 50 से अधिक स्टार्टअप्स के साथ मिलकर मैन्युफैक्चरिंग ईकोसिस्टम को मजबूत कर रही है। इसमें स्टार्टअप्स के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट और स्टार्टअप ग्रैंड चैलेंज जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।
क्या कहते हैं आंकड़ें?
एथर एनर्जी जैसे निर्माता भारत के ईवी सेगमेंट को गति दे रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार FY 2024-25 में 11,49,334 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की बिक्री हुई। पिछले वर्ष के 9,48,561 यूनिट्स से 21 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई थी। जो रफ्तार संकेत देता है कि भारत में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन आम उपभोक्ताओं के बीच तेजी से स्वीकार किए जा रहे हैं।
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इस योजना का असर
फेम इंडिया योजना (इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाना और उनका विनिर्माण) फेज-II ने मांग प्रोत्साहन देकर ईवी अपनाने में अहम भूमिका निभाई है। इससे उपभोक्ता कीमत कम हुई, घरेलू निर्माण को बढ़ावा मिला और स्टार्टअप इकोसिस्टम मजबूत हुआ है।
रोड सेफ्टी और स्मार्ट सिस्टम
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि सेमीकंडक्टर मिशन के जरिए एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS), रियल-टाइम डेटा एनालिटिक्स, स्मार्ट ब्रेकिंग और स्टेबिलिटी कंट्रोल जैसी तकनीकों को और सुलभ बनाया जा सकता है। इनका मानना है कि इंटेलिजेंट वाहन सिस्टम सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।