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Atal Setu: मोटर चालकों ने ईंधन-समय की बचत के लिए अटल सेतु की तारीफ की, साथ ही उठी सरकारी बसें चलाने की मांग

Sat, 13 Jan 2024 10:09 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुक्रवार को लोकार्पित 21.8 किलोमीटर लंबा अटल सेतु समय और ईंधन की बचत करेगा। साथ ही भीड़भाड़ की समस्या को कम करेगा और प्रदूषण को भी कम करेगा। लेकिन परिवहन कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर इस पर सार्वजनिक परिवहन बसें नहीं चलतीं तो यह "कम इस्तेमाल" होगा।
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PM Modi on Atal Setu Mumbai - फोटो : PTI
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुक्रवार को लोकार्पित 21.8 किलोमीटर लंबा अटल सेतु समय और ईंधन की बचत करेगा। साथ ही भीड़भाड़ की समस्या को कम करेगा और प्रदूषण को भी कम करेगा। लेकिन परिवहन कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर इस पर सार्वजनिक परिवहन बसें नहीं चलतीं तो यह "कम इस्तेमाल" होगा। यह समुद्री पुल शनिवार सुबह से मोटर चालकों के लिए खोल दिया गया है।
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प्रधानमंत्री ने 17,840 करोड़ रुपये का अटल बिहारी वाजपेयी सेवरी-नहावा शेवा अटल सेतु का उद्घाटन किया, जिसे मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक भी कहा जाता है। यह मुंबई और उपग्रह शहर नवी मुंबई के बीच के यात्रा के समय को कुछ घंटों से घटाकर 15-20 मिनट कर देगा। इस प्रक्रिया में क्षेत्र में विकास को बढ़ावा मिलेगा, जहां एक मेगा पोर्ट और एक आगामी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी है।

अटल सेतु, जो देश का सबसे लंबा पुल और समुद्री पुल है, 21.8 किलोमीटर लंबा है। जिसमें 16.5 किलोमीटर का हिस्सा समुद्र के ऊपर है। यह पुल महानगर से नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की दूरी कम करेगा और राज्य के दूसरे सबसे बड़े शहर पुणे और आगे गोवा और दक्षिण भारत के बाकी हिस्सों की यात्रा के समय को भी कम करेगा।
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कुछ मोटर चालकों के अनुसार, अटल सेतु पड़ोसी रायगढ़ जिले के पनवेल में पलासफे फाटा और दक्षिण मुंबई में राज्य सचिवालय, मंत्रालय के बीच की दूरी को कम से कम 5-6 किलोमीटर कम कर देगा, जो इस समय वाशी क्रीक पुल के रास्ते लगभग 53 किलोमीटर है।

उन्होंने कहा कि इससे कम से कम एक घंटे का यात्रा समय बचेगा। हालांकि सरकार का दावा है कि यह दो घंटे की बचत होगी।

Atal Setu - फोटो : सोशल मीडिया
मोटर चालक प्रवीण शिंदे ने तर्क दिया, "वर्तमान में मंत्रालय से पलासफे फाटा तक पहुंचने में दो घंटे से ज्यादा का समय लगता है। अब मोटर चालक 20 मिनट में एमटीएचएल पार कर सकते हैं। लेकिन वहां पहुंचने के लिए, पीडी मेलो रोड से गुजरना होगा और पुल से बाहर निकलने के बाद और दूरी तय करनी होगी।"

एमटीएचएल में एक ओपन टोलिंग सिस्टम होगा, जिसके कारण वाहनों को टोल गेटों पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह हाईवे और अन्य पुलों पर बूथों पर भुगतान की प्रक्रिया से अलग है।

एक वरिष्ठ आरटीओ अधिकारी ने बताया, "वाहन तेज रफ्तार से चल रहा हो तब भी टोल राशि काट ली जाएगी। इसलिए, मोटर चालकों को उन बूथों पर लगने वाले जाम से बचाया जाएगा। फास्टटैग या आरएफआईडी रीडरों में कोई समस्या होने पर कुछ लेन नकद में टोल देने के लिए भी होंगी।"

नवी मुंबई की निवासी और सहायक प्रोफेसर नजुका सावंत ने कहा कि समुद्री पुल उन लोगों के लिए काम आएगा जो दक्षिण मुंबई और पूर्वी उपनगरों तक पहुंचना चाहते हैं। लेकिन जो लोग पश्चिमी उपनगरों तक पहुंचना चाहते हैं उनके लिए बहुत उपयोगी नहीं होगा। जब तक कि महानगर के दक्षिण-मध्य भाग में सेवरी और वर्ली के बीच निर्माणाधीन लिंक तैयार नहीं हो जाता है।

सावंत ने दावा किया, "मोटर चालकों को मुंबई से बाहर निकलने का एक और विकल्प मिल गया है। हालांकि वर्तमान मार्ग की तुलना में यह महंगा होगा, लेकिन मुंबई से बाहर निकलना आसान और तेज होगा। एमटीएचएल और उसके आगे पलासफे फाटा तक का रास्ता सिग्नल-फ्री है। इससे मोटर चालकों को ट्रैफिक जाम और उनसे होने वाली मानसिक थकान से राहत मिलेगी।"

अटल सेतु अन्य मोटर चालकों के अनुसार, अति व्यस्त वाशी क्रीक पुल पर बोझ कम करेगा।

अटल सेतु - फोटो : ANI
मुंबई यातायात पुलिस ने अधिकतम गति सीमा 100 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की है। और दोपहिया वाहनों और ट्रैक्टरों के प्रवेश पर रोक लगा दी है।

मुंबई मोबिलिटी फोरम और एक थिंक टैंक के परिवहन कार्यकर्ता एवी शेनॉय ने कहा कि अभी तक इस बात पर कोई फैसला नहीं हुआ है कि सार्वजनिक परिवहन बसों को कब तक समुद्री पुल का इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाएगी।

शेनॉय ने दावा किया, "जब तक सार्वजनिक परिवहन बसें पुल पर नहीं चलेंगी, यह सिर्फ कार उपयोगकर्ताओं के लिए उपयोगी होगा, आम जनता के लिए नहीं। सी लिंक के विपरीत, उच्च टोल दरों के कारण, कई मोटर चालक, कैब चालक और ट्रक चालक इसका इस्तेमाल नहीं करेंगे, जिससे संरचना का कम इस्तेमाल होगा।"

उन्होंने आगे कहा कि परिवहन आयुक्त या MMRTA (मुंबई महानगर क्षेत्र परिवहन प्राधिकरण) को पुल पर सार्वजनिक परिवहन बसों के संचालन के बारे में फैसला लेना चाहिए था और BEST या नवी मुंबई महानगर परिवहन (NMMT) की सेवाएं पहले दिन से ही संचालित होनी चाहिए थीं। 
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अटल सेतु - फोटो : ANI
कितना लगेगा टोल शुल्क
जैसा कि राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना में बताया गया है, हल्के मोटर वाहनों जैसे कारों और जीपों को सीवरी और गवण के बीच 250 रुपये का सिंगल-यात्रा टोल देना होगा। जबकि यह दर सीवरी और शिवाजी नगर के बीच 200 रुपये और शिवाजी नगर और गवण के बीच 50 रुपये होगी।

मिनी बसों और मल्टी-एक्सल वाहनों के लिए, सीवरी और गवण के बीच एकल यात्रा टोल दर 400 रुपये से 1500 रुपये तक होगी। जबकि यही दर सीवरी और शिवाजी नगर के बीच 320 रुपये से 1255 रुपये और शिवाजी नगर और गवण के बीच 80 रुपये से 325 रुपये तक होगी। अधिसूचना में बताया गया है।

रिटर्न जर्नी पास और डेली पास क्रमशः एक-तरफा टोल का डेढ़ गुना और ढाई गुना होंगे। मासिक पास दर एकतरफा टोल का 50 गुना निर्धारित की गई है।

अधिसूचना के मुताबिक, ये टोल दरें 31 दिसंबर, 2024 तक लागू रहेंगी।

एमटीएचएल का विचार पहली बार 1963 में आया था। जब एक सलाहकार ने इसका प्रस्ताव रखा था, हालांकि अगले चार दशकों में यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई थी।

पिछले दो दशकों में, सरकार ने दो बार परियोजना के लिए निविदाएं जारी कीं। लेकिन अधिकारियों के मुताबिक, यह इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (ईपीसी) मॉडल अपनाने के बाद ही शुरू हुआ।
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