देश में हर साल लाखों सड़क हादसे होते हैं। जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो जाती है और बड़ी संख्या में ही लोग घायल होते हैं। हम इस खबर में आपको बता रहे हैं कि महाराष्ट्र में आरटीओ की ओर से ऐसे हादसों को रोकने के लिए निजी बसों की जांच के लिए विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान में कितनी बसों के खिलाफ कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी भी इस खबर में दे रहे हैं।
महाराष्ट्र में चला अभियान
परिवहन विभाग की ओर से जानकारी दी गई कि महाराष्ट्र में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) की ओर से सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए जून महीने में एक विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान के दौरान बड़ी संख्या में निजी बसों की जांच की गई। इस दौराना 14,000 से ज्यादा निजी बसों में से लगभग 30 प्रतिशत नियमों का उल्लंघन करती पाई गईं।
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कितनी बसों ने किया उल्लंघन
विभाग की ओर से जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, आरटीओ ने 15 मई से 30 जून के बीच चलाए गए विशेष अभियान के तहत 14,161 निजी बसों की जांच की। जिनमें से 4,277 या करीब 30 फीसदी बसें वाहन नियमों और विनियमों का उल्लंघन करते पाई गईं।
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मिलीं ये खामियां
विशेष अभियान के दौरान नियमों का उल्लंघन करते हुए पकड़ी गई बसों में से 1,702 बसें रिफ्लेक्टर, संकेतक और टेल लाइट के मानदंडों का उल्लंघन करती पाई गईं। करीब 890 बसें बिना परमिट के चल रही थीं या परमिट शर्तों का पालन नहीं कर रही थीं। वैध फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं होने पर 570 बसों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, जबकि 514 बसों में आग बुझाने की व्यवस्था नहीं थी. कुल 485 बसों ने मोटर वाहन कर का भुगतान नहीं किया था। 293 बसों में आपातकालीन निकास गैर-कार्यात्मक पाए गए, जबकि 227 बसें अवैध रूप से सामान ले जाते हुए पाई गईं। 147 बसें जरूरत से ज्यादा यात्रियों को ले जा रही थीं, 72 बसें बिना स्पीड गवर्नर के चल रही थीं और 40 बसें यात्रियों से ज्यादा किराया वसूल रही थीं।
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जुर्माने में मिले करोड़ों रुपये
विभाग की ओर से जारी रिलीज के मुताबिक ऐसी सभी बसों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए जुर्माना लगाया गया। राज्य में नियमों का उल्लंघन करने वाली बसों के मालिकों से जुर्माने के रूप में 1.87 करोड़ रुपये वसूले गए। जानकारी के मुताबिक यह विशेष अभियान उन बसों के खिलाफ कार्रवाई करने पर केंद्रित रहा, जो गर्मियों की भीड़ का फायदा उठाकर यात्रियों से अधिक किराया वसूल रही थीं।
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