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शुक्र का वृषभ राशि में हुआ प्रवेश, जानिए ज्योतिष में शुक्र ग्रह का महत्व

Tue, 04 May 2021 06:43 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • कुंडली में शुक्र ग्रह के मजबूत होने पर वैवाहिक जीवन में सुख बना रहता है और सभी तरह के ऐशोआराम और भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है।
  • 4 मई को दोपहर 1 बजकर 23 मिनट पर अपनी स्वयं की राशि वृषभ में प्रवेश कर चुके हैं।
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शुक्र के अस्त होने पर सभी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य थम जाते हैं। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जीवोत्पत्ति के कारक ग्रह शुक्र मेष राशि की यात्रा समाप्त करके 4 मई को दोपहर 1 बजकर 23 मिनट पर अपनी स्वयं की राशि वृषभ में प्रवेश कर चुके हैं। इस राशि पर ये 28 मई की रात्रि 11 बजकर 57 मिनट तक गोचर करेंगे उसके बाद मिथुन राशि में प्रवेश कर जाएंगे। अपनी राशि में पहुँचकर ये वहाँ पहले से ही विराजमान बुध और राहु के साथ युति करेंगे। इनके 'बृषभ' राशि में गोचर के परिणामस्वरूप राहु के अशुभ प्रभाव में और कमी आएगी। जिन जातकों की जन्मकुंडली में राहु अशुभ भाव में गोचर कर रहे हैं उनके लिए यह राहत भरा समाचार है। अपनी राशि में गोचर करते हुए शुक्र मालव्य योग का निर्माण करेंगे किंतु, इसका आंशिक फल ही जातकों को मिल पाएगा क्योंकि ये सदोष भी हो गए हैं। जन्मकुंडली में शुक्र के स्वस्थ एवं शुभभाव में होने से जातक को जीवन में संगीत, कला, सौंदर्य, देश विदेश की यात्राएं, सुगंधित पदार्थों, भोग-विलास, पति-पत्नी के बीच में संबंध, संतान सुख, व्यापारिक सहयोगी, वस्त्र-आभूषण, वाहन सुख, फिल्म के क्षेत्र, भारी उद्योग, खाद्य पदार्थ, होटल, रेस्टोरेंट, एविएशन आदि के क्षेत्र में अच्छी सफलता मिलती है। वृषभ एवं तुला राशि के स्वामी शुक्र कन्या राशि में नीचराशिगत तथा मीन राशि में उच्चराशिगत संज्ञक माने गए हैं।

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ज्योतिष में शुक्र ग्रह
- सभी ग्रहों में कुछ ग्रह शुभ तो कुछ अशुभ फल देने वाले होते हैं। ज्योतिष में शुक्र एक शुभ ग्रह है। वैदिक ज्योतिषशास्त्र में इसे शुक्र ग्रह को भौतिक सुख, संपन्नता, कला शोहरत, भोग विलासिता, सौन्दर्य, काम वासना और ऐश्वर्य आदि का कारक माना जाता है। 
-शुक्र वृषभ और तुला राशि के स्वामी है। कन्या राशि शुक्र ग्रह की नीच राशि और मीन उच्च राशि है।
- शुक्र ग्रह भरणी, पूर्वा फाल्गुनी और पूर्वाषाढ़ा जैसे नक्षत्रों के स्वामी ग्रह हैं।
- बुध और शनि शुक्र ग्रह के मित्र जबकि सूर्य और चंद्रमा शत्रु ग्रह माने जाते हैं।
- शुक्र ग्रह को एक राशि से दूसरी राशि में आने के लिए करीब 23 दिनों तक का समय लेते हैं।
- कुंडली में शुक्र ग्रह के मजबूत होने पर वैवाहिक जीवन में सुख बना रहता है और सभी तरह के ऐशोआराम और भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है।
- कुंडली में शुक्र ग्रह कमजोर होने पर वैवाहिक जीवन में कई तरह की परेशानियां आती हैं।
- शुक्र के अस्त होने पर सभी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य थम जाते हैं।

शुक्र ग्रह के उपाय
- रोजाना शुक्र मंत्र का जप करें। ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः  इससे शुक्र ग्रह से अच्छे फल की प्राप्ति होती है।
- कुंडली में शुक्र की शुभता पाने के लिए शुक्र यंत्र को विधिविधान से पूजा करवाकर पूजन स्थल में रखने पर लाभ प्राप्त होता है। यंत्र का स्थापित करने के पश्चात् सफेद पुष्प अर्पित करते हुए उसकी नियमित रूप से पूजा भी करना चाहिए। 
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- शुक्रवार के दिन सफेद वस्तुओं का दान करना और काली चीटिंयों को चीनी और सफेद गाय को आटा खिलाना अति शुभ होता है। 
- शुक्र की शुभता प्रदान करने वाले रत्नों में हीरा,सफेद पुखराज आदि रत्न हैं। इसके अलावा स्फटिक की माला और चांदी का कड़ा धारण करने से भी शुक्र की शुभता प्राप्त होती है।
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