महानगरों में इन दिनों बेसमेंट
बनवाने का प्रचलन बढ़ गया है। लेकिन वास्तु विज्ञान के अनुसार घर में बेसमेंट का
होना वास्तु के नियम के विरुद्ध है। इसका कारण यह है कि बेसमेंट भूमि के नीचे होता
है जिससे यहां सूर्य की रोशनी एवं प्राकृतिक वायु नहीं पहुंच पाती है। इससे बेसमेंट
में सकारात्मक उर्जा की कमी रहती है। लगतार बेसमेंट में रहने से स्वास्थ्य पर
विपरीत प्रभाव पड़ता है। जिन लोगों के लिए बेसमेंट बनवाना जरूरी हो उन्हें इसके
निर्माण के समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
बेसमेंट की छत 9 से 10 फीट
ऊंची बनवाएं ताकि बेसमेंट पूरी तरह जमीन के भीतर न रहे। बेसमेंट का मुख्यद्वार पूरब
या उत्तर पूर्व दिशा में बनवाएं ताकि बेसमेंट में प्राकृतिक रोशनी आ सके। उत्तर और
पूर्वी भाग को खुला रखें ताकि वायु का प्रभाव लगातार बना रहे। प्लाट के किसी एक भाग
में बेसमेंट बनाना हो तो उत्तर अथवा पूर्व दिशा में बेसमेंट बनवाएं।
बेसमेंट को अंदर से पिंक या ग्रीन कलर से पेंट कराना चाहिए। डार्क ब्लैक और
रेड कलर बेसमेंट के लिए अनुकूल नहीं होता है। इससे बेसमेंट की उर्जा प्रभावित होती
है। बेसमेंट के मुख्य द्वार पर उर्जा प्रदान करने वाले पौधे लगाने चाहिए। तुलसी और
गुलाब का पौधा बेसमेंट के बाहर लगाना बेहतर होता है। बेसमेंट में काम करने वाले कों
हमेशा अपना मुंह पूर्व दिशा की ओर रखना चाहिए।