वास्तु के अनुसार पश्चिम मुखी घर क्या है?
बहुत से लोग इस बात को लेकर भ्रमित हो जाते हैं कि अपने घर/स्थल की दिशा का निर्धारण कैसे करें। सही दिशा की पहचान करने के लिए आप दरवाजे से बाहर निकलें। जब आप घर के दरवाजे से बाहर निकलते हैं, तो आपका मुख जिस भी दिशा में हो वही घर की दिशा होती है। इसलिए, यदि आप घर के अंदर खड़े होकर बाहर देखते समय पश्चिम दिशा की ओर मुंह कर रहे हैं, तो यह वास्तु शास्त्र के अनुसार पश्चिम मुखी घर माना जाता है।
क्या पश्चिम मुखी घर वास्तु के अनुसार शुभ होते हैं?
अक्सर आपने घर के बड़े बुजुर्गों से सुन होगा कि पश्चिम दिशा की ओर मुख वाला घर वास्तु शास्त्र के अनुसार शुभ नहीं होता है, लेकिन यह सच नहीं है। हालांकि पूर्व या उत्तर मुखी घर को हमारे यहां प्राथमिकता दी जाती है लेकिन जरूरी नहीं कि हमेशा आदर्श घर मिल पाए। ऐसे में यदि आप ऐसे घर में जाने की योजना बना रहे हैं या अपने पश्चिम मुखी घर के नवीनीकरण के बारे में सोच रहे हैं, तो वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों और इन टिप्स का उपयोग किया जा सकता है।
पश्चिम मुखी घर से जुड़े वास्तु टिप्स
प्रवेश द्वार पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में रखें
वास्तु शास्त्र के अनुसार पश्चिम मुखी संपत्ति में घर का मुख्य द्वार आदर्श रूप से उत्तर-पश्चिम या पश्चिम दिशा में होना चाहिए। आपको दक्षिण-पश्चिम दिशा में प्रवेश द्वार रखने से बचना चाहिए।
घर के सामने की ओर पेड़-पौधे लगाएं
मुख्य द्वार को छोड़कर, घर के सामने पेड़ लगाने से सूरज की किरणों से होने वाली गर्मी को रोका जा सकता है और घर पर ठंडक का प्रभाव पड़ता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि घर का पश्चिमी भाग अन्य दिशाओं की तुलना में अधिक आसानी से गर्म हो जाता है।
पश्चिम दिशा में बड़े शीशे का प्रयोग करने से बचें
सूरज की तेज़ किरणों को घर में प्रवेश करने और उसे ज़्यादा गरम होने से रोकने के लिए, आपको बड़ा शीश लगाने से बचना चाहिए।
उत्तर-पश्चिम दिशा में लिविंग रूम बनाएं
वास्तु शास्त्र कहता है कि लिविंग रूम घर के प्रवेश द्वार के पास स्थित होना चाहिए।
शयनकक्ष नैऋत्य कोण में बनाएं
वास्तु शास्त्र के अनुसार शयनकक्ष के लिए आदर्श स्थान दक्षिण-पश्चिम दिशा है। इस कमरे में कोई दर्पण नहीं होना चाहिए, लेकिन आपको सलाह दी जाती है कि यदि दर्पण हटाया नहीं जा सकता है तो उन्हें ढक दें। पूर्व या दक्षिण दिशा में सिर करके सोने की सलाह दी जाती है।
रसोईघर दक्षिण-पूर्व कोने में रखें
वास्तु सम्मत पश्चिम मुखी घर में रसोई का शुभ स्थान दक्षिण-पूर्व दिशा में होता है। आपको घर के दक्षिण-पश्चिम भाग में रसोईघर बनाने से बचना चाहिए। भोजन कक्ष की आदर्श दिशा पश्चिम है और वास्तु शास्त्र पूर्व दिशा की ओर मुख करके भोजन करने की सलाह देता है।
पूजाघर उत्तर-पूर्व दिशा में रखा जा सकता है
घर का उत्तर-पूर्व मंदिर या पूजा कक्ष के लिए एक आदर्श स्थान है।
उत्तर-पश्चिम में शौचालय/स्नानघर के लिए सर्वोत्तम स्थान
वास्तु शास्त्र बाथरूम को अधिमानतः उत्तर-पश्चिम में या अन्यथा पूर्व में रखने की सलाह देता है।
घर में दरवाजे सम संख्या में रखें
वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि संभव हो तो आपके घर में दरवाजे सम संख्या में होने चाहिए।
घर के पश्चिम और दक्षिण दिशा में खिड़कियां रखने से बचें
पर्याप्त धूप लाने के साथ-साथ कड़ी धूप से बचने के लिए, उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में खिड़कियां रखना सबसे अच्छा है और अधिकतम खिड़कियां पूर्व दिशा में होनी चाहिए।