प्रत्येक वर्ष आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि के पश्चात श्रावण मास आरंभ हो जाता है। इस बार 25 जुलाई दिन रविवार से श्रावण मास की शुरुआत हो रही है। इस पूरे माह में भगवान शिव की पूजा आराधना और मंत्र जाप का विशेष महत्व माना जाता है। सनातन धर्म में सभी देवों में भगवान शिव को सबसे उच्च स्थान प्राप्त है। इन्हें कालों का काल महाकाल कहा जाता है। इनकी कृपा से काल भी मनुष्य का कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। शास्त्रों में भगवान शिव के कई चमत्कारिक मंत्र बताए गए हैं। इन्हीं में से एक है महामृत्युंजय मंत्र। यह मंत्र बहुत ही शक्तिशाली माना गया है। मान्यतानुसार कहा जाता है कि यदि इस मंत्र का जाप यदि एक निश्चित संख्या में किया जाए तो बड़े से बड़ा असाध्य रोग भी टल जाता है। इस मंत्र के विषय में पौराणिक मान्यता है कि इसके जाप से मृत्यु का संकट भी टल जाता है। किसी की कुंडली में यदि मृत्यु का योग बने तो महामृत्युंजय मंत्र के जाप का उपाय बताया जाता है। मान्यता अनुसार इसके जाप से मनुष्य को लंबी आयु प्राप्त होती है। सावन के माह में इस मंत्र का जाप करना बहुत ही शुभफलदायी रहता है। भगवान शिव की कृपा से यमराज भी ऐसे व्यक्ति को कोई कष्ट नहीं देते हैं। आइए जानते हैं कि महामृत्युंजय मंत्र को क्यों माना गया है इतना प्रभावशाली और इस महा मंत्र की रचना कैसे हुई।