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Abhijit Muhurat: क्या होता है अभिजीत मुहूर्त, जानिए ज्योतिष शास्त्र में इसका महत्व

Wed, 28 Jun 2023 04:57 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

भगवान श्री रामचंद्र का जन्म अभिजीत मुहूर्त में होने से इस लोकप्रिय मुहूर्त का नाम लोगों की जिव्हा पर हमेशा रहता है।
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What Is Abhijit Muhurat: अभिजीत मुहूर्त में अनेक दोषों को नष्ट करने की अद्भुत ताकत होती है। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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What Is Abhijit Muhurat: प्राचीन समय से ही मांगलिक कार्यों के सफलतापूर्वक निष्पादन के लिए शुभ लग्न अथवा शुभ बेला का विचार किया जाता रहा है। हमारे ऋषि-मुनियों ने लाखों वर्षों पहले एक चीज स्पष्ट रूप से समझा दी थी कि किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले एक अच्छे मुहूर्त का होना बहुत ही आवश्यक है। भगवान श्री रामचंद्र का जन्म अभिजीत मुहूर्त में होने से इस लोकप्रिय मुहूर्त का नाम लोगों की जिव्हा पर हमेशा रहता है। भगवान राम सूर्यवंशी थे, उनका जन्म दिन में पड़ने वाले अभिजीत मुहूर्त में हुआ। ठीक उसी प्रकार चंद्रवंशी भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रात को पड़ने वाले अभिजीत मुहूर्त में हुआ। इसीलिए श्रीराम और श्रीकृष्ण इन दो महान अवतारों के प्राकट्य वाले अभिजीत मुहूर्त की महत्ता हमेशा विशिष्ट है। 

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दिन में दो-दो घटी वाले 15 मुहूर्त पड़ते हैं वैसे ही 15 मुहूर्त रात्रि में पड़ते हैं। यह चौघड़िया की तरह दिन और रात्रि में एक समान होते हैं। 15 मुहूर्त में से 7 मुहूर्तो के बाद आने वाला आठवां मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त कहलाता है। इस प्रकार से अभिजीत मुहूर्त दिन के मध्य में और रात्रि के मध्य में ही निर्मित होता है। इस मुहूर्त की एक खासियत यह भी होती है कि सप्ताह के 7 दिनों में इसे मध्य में आने वाले दिन बुधवार को यह मुहूर्त वर्जित माना जाता है। अभिजीत मुहूर्त में जन्म लेने वाले भगवान श्रीकृष्ण और प्रभु श्रीराम ने रावण और कंस जैसे असुरों का वध किया इसीलिए इससे विजय मुहूर्त भी कहा जाता है। 

अभिजीत मुहूर्त में अनेक दोषों को नष्ट करने की अद्भुत ताकत होती है। जब आपको किसी शुभ कार्य के लिए कोई शुभ लग्न या शुभ मुहूर्त नहीं मिल रहा हो तो आप अपने उस शुभ कार्य को अभिजीत मुहूर्त में कर सकते हैं। सिर्फ बुधवार के दिन इसका निषेध रहता है इसलिए बुधवार के दिन अभिजीत मुहूर्त में कोई भी काम आपको नहीं करना चाहिए। इस मुहूर्त में किए गए समस्त कार्य सदैव सफल होते हैं। बहुत जल्दी पूरे हो जाते हैं, समस्त दोषों का नाश कर शुभ फल प्रदान करने वाला यह मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। 
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दोपहर 11:45 से लगभग 12:30 तक यह मुहूर्त रहता है। जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर रहते हैं तब अभिजीत मुहूर्त की बेला होती है। अगर अभिजीत मुहूर्त के अलावा बात करें तो आषाढ़ शुक्ल नवमी, कार्तिक शुक्ल एकादशी, माघ शुक्ल पंचमी और फाल्गुन शुक्ल द्वितीया यह 4 स्वयं सिद्ध मुहूर्त होते हैं। इनमें कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य करने के पहले किसी भी प्रकार के पंचांग को देखने की कोई आवश्यकता नहीं होती। आप बिना किसी हिचक के अपना शुभ कार्य कर सकते हैं क्योंकि यह मुहूर्त हार्दिक प्रसन्नता के हेतु भी बन चुके हैं।

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