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Vipreet Rajyog: क्या है विपरीत राजयोग? जानें कैसे बनता है यह शुभ योग और इसका कुंडली में प्रभाव

Sat, 19 Apr 2025 05:11 PM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Vipreet Rajyog Kya Hai: जब किसी जातक की कुंडली में छठे, आठवें और बारहवें भाव के स्वामी विशेष रूप से एक स्थान पर आते हैं, तो विपरीत राजयोग का निर्माण होता है। हालांकि, यह नाम 'विपरीत' होने के बावजूद, इस योग के निर्माण से जातक के जीवन में सकारात्मक बदलाव हो सकते हैं।
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कैसे बनता है विपरीत राजयोग - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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Vipareet Rajyog: विपरीत राजयोग ज्योतिष शास्त्र में एक महत्वपूर्ण और रहस्यमयी योग माना जाता है। यह योग सामान्यत: शुभ ग्रहों की युति से नहीं, बल्कि अशुभ ग्रहों के विशिष्ट स्थानों पर स्थित होने से बनता है। जब किसी जातक की कुंडली में छठे, आठवें और बारहवें भाव के स्वामी विशेष रूप से एक स्थान पर आते हैं, तो विपरीत राजयोग का निर्माण होता है। हालांकि, यह नाम 'विपरीत' होने के बावजूद, इस योग के निर्माण से जातक के जीवन में सकारात्मक बदलाव हो सकते हैं।

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विशेष रूप से विमल राजयोग एक ऐसा योग है, जिसे शुभ माना जाता है। इस योग के प्रभाव से व्यक्ति को अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, उसकी बुद्धि तेज होती है, और वह अपने जीवन में धन और सम्मान अर्जित करता है। यह योग जातक को मुसीबतों से बाहर निकलने और अपने जीवन को एक नई दिशा देने की क्षमता भी प्रदान करता है। आइए जानते हैं विपरीत राजयोग के प्रकार और कुंडली में इसका प्रभाव। 
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कैसे बनता है विपरीत राजयोग - फोटो : amar ujala
विपरीत राजयोग के प्रकार
विपरीत राजयोग के तीन प्रमुख प्रकार होते हैं- हर्ष राजयोग, सरल राजयोग और विमल राजयोग। ये सभी राजयोग अपनी विशेषताओं के अनुसार व्यक्ति के जीवन में अलग-अलग प्रभाव डालते हैं।
  • जब छठे भाव के स्वामी ग्रह आठवें या बारहवें भाव में बैठते हैं, तो हर्ष राजयोग का निर्माण होता है। यह योग व्यक्ति को शत्रुओं से विजय प्राप्त करने और उनके खिलाफ संघर्ष में सफलता दिलाता है। व्यक्ति की मानसिक स्थिति सशक्त होती है और वह अपनी चुनौतियों से आसानी से पार पाता है।
  • जब आठवें भाव के स्वामी ग्रह छठे और बारहवें भाव में होते हैं, तो यह योग सरल राजयोग बनता है। यह योग व्यक्ति को विशेष प्रकार की आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्ति, गुप्त विद्या, और रहस्यमयी विषयों में गहरी समझ प्रदान करता है। इसके साथ ही, जीवन में आने वाली कठिनाइयों से बाहर निकलने का रास्ता भी खुलता है।
  • विमल राजयोग तब बनता है जब बारहवें भाव के स्वामी ग्रह छठे और आठवें भाव में स्थित होते हैं। यह योग विशेष रूप से शुभ माना जाता है और व्यक्ति को हर प्रकार की मानसिक शांति और सुख-सुविधाएं प्रदान करता है। इस योग से व्यक्ति को आर्थिक उन्नति, धन अर्जन, और जीवन में संतुलन मिलता है।
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कैसे बनता है विपरीत राजयोग - फोटो : amar ujala
कुंडली में विमल राजयोग
जब कुंडली में विपरीत राजयोग बनता है, तो यह व्यक्ति के लिए लाभकारी साबित हो सकता है, बशर्ते उसकी ग्रह स्थिति और उनके प्रभाव को ठीक से समझा जाए। विशेष रूप से, विमल राजयोग एक बहुत ही शुभ योग होता है, जो जीवन में कई तरह की सुख-समृद्धि लाता है।
विपरीत राजयोग  भले ही इसे अशुभ योग माना जाता हो, लेकिन जब यह सही ग्रहों की स्थिति के साथ बनता है, तो यह व्यक्ति के जीवन में अपार सफलता और उन्नति का कारण बन सकता है। इसके माध्यम से व्यक्ति को न केवल शत्रुओं से विजय प्राप्त होती है, बल्कि यह उसे अपने जीवन में आए हुए कठिन समय से बाहर निकलने की भी शक्ति प्रदान करता है। 



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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