Vastu Tips: भारतीय वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में मौजूद पंचतत्व पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश हमारे रहने की गुणवत्ता और घर की ऊर्जा को नियंत्रित करते हैं। इन तत्वों में से पौधे (वायु तत्व), जल (जल तत्व) और रंग विशेष रूप से मनोवैज्ञानिक और वातावरणीय असर रखते हैं। रंग मन और भावनाओं पर गहरा प्रभाव डालते हैं, इसलिए वास्तु में रंगों के प्रयोग को बहुत महत्व दिया गया है। यदि इन तीनों का सामंजस्य सही दिशा और रूप में रखा जाए तो घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और रहन-सहन में सुकून आता है।
जल तत्व: फव्वारा, एक्वेरियम और स्वच्छता
जल तत्व से भावनात्मक स्थिरता और समृद्धि जुड़ी होती है। एक्वेरियम या छोटा फव्वारा उत्तर-पूर्व दिशा में रखने से शुभता आती है। यह दिशा सकारात्मक ऊर्जा के संचार के लिए अनुकूल मानी जाती है। एक्वेरियम में विशेषकर सुनहरी या लाल मछलियाँ शुभ फलदायी मानी जाती हैं, पर पानी हमेशा स्वच्छ और प्रवाहित रखें। स्टैण्डिंग वॉटर या गंदा पानी किसी भी दिशा में खराब संकेत देता है। जल स्रोतों का रख-रखाव और साफ-सफाई नियमित रखें।
रंगों का वास्तु और कमरों के अनुसार चयन
उत्तर दिशा पर हल्का हरा या नीला करियर तथा आर्थिक प्रगति के लिए शुभ है। शयनकक्ष में शांत और सौम्य रंगजैसे क्रीम, हल्का गुलाबी या पीच,रिश्तों और विश्राम के लिए अनुकूल हैं। गहरे और भारी रंग तनाव बढ़ा सकते हैं। रंगों के संयोजन में ध्यान रखें कि अत्यधिक विरोधी रंगों का मेल नेगेटिव वाइब दे सकता है इसलिए दीवारों, पर्दों और सजावट में सामंजस्य रखें।