ज्योतिष में शनि ग्रह को सबसे मंद गति से चलने वाला ग्रह माना जाता है। शनिदेव किसी एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने में ढ़ाई साल का समय लगाते है। शनि की मंद गति से चलने और राशि परिवर्तन करने से इसका प्रभाव सभी राशियों के जातकों के साथ-साथ देश-दुनिया पर भी पड़ता है। शनि के गोचर करने से किसी राशि में साढ़ेसाती शुरू हो जाती है तो वहीं किसी राशि पर साढ़ेसाती की शुरुआत हो जाती है। ज्योतिष में शनिदेव को कर्मफलदाता माना गया है यानी यह व्यक्तियों को उनके कर्म को आधार पर शुभ या अशुभ फल प्रदान करते हैं। आपको बता दें कि इसी साल शनि का राशि परिवर्तन हुआ है। 29 मार्च 2025 को शनिदेव कुंभ से निकलकर मीन राशि में प्रवेश किया है। जिससे कुछ राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती शुरू हो चुकी है। साल 2027 तक शनिदेव मीन राशि में ही रहेंगे, ऐसे में आइए जानते हैं किन-किन राशि वालों को परेशानियों से गुजरना पड़ सकता है।
इन राशियों पर साढ़ेसाती का अशुभ प्रभाव
शनि के मीन राशि में गोचर करने के कारण साल 2027 तक मेष राशि के जातकों पर शनि का कष्टकारी समय जारी रहेगा। इसके अलावा मीन राशि पर दूसरा चरण और कुंभ राशि पर साढ़ेसाती का तीसरा चरण रहेगा। मेष, मीन और कुंभ राशि पर साल 2027 तक प्रभाव रहने के कारण इन राशि वालों की मुश्किलों में इजाफा हो सकता है। समय-समय पर परेशानियों में इजाफा होगा। आय में अनिश्चतता रहेगी। जो लोग नौकरी में बदलाव लाना चाह रहे हैं उनको को अभी पुरानी में बने रहना होगा।
साल 2027 तक शनि की ढैय्या
शनि के मीन राशि में गोचर करने से साल 2027 तक धनु और सिंह राशि पर शनि की ढैय्या का प्रभाव बना रहेगा। ऐसे में इन राशि वालों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। कार्यों में रुकावटें आती हैं और सेहत में गिरावटें आती है। इस दौरान धन की हानि होने से आपको मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है।
शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय
- शनि के अशुभ प्रभावों से मुक्ति पाने के लिए अमावस्या पर पीपल की जड़ में कच्चा दूध मिश्रित मीठा जल चढ़ाने, तिल या सरसों के तेल का दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है। शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के चलते पीपल के पेड़ की पूजा करना और उसकी परिक्रमा करने से शनि की पीड़ा से मुक्ति मिलती है। वहीं सुख-शांति में वृद्धि के लिए इस दिन पीपल का वृक्ष रोपना बहुत अच्छा माना गया है।
- हर शनिवार के दिन एक लोहे के कटोरे में साबुत उड़द, काले चने और सरसों का तेल मिलाकर एक साथ डाल दें। अब इसे काले कपड़े में लपेटकर अपने माथे से लगाकर इसे दान देना शुरू करें, इससे शनि दोष कम होता है।
- शनिवार के दिन शनिदेव के दिव्य मंत्र ‘ऊं प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:’ का इस दिन जप करने से प्राणी भयमुक्त रहता है।
- शनिदेव के आराध्य भगवान शिव हैं। शनि दोष की शांति के लिए शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा के साथ-साथ शिवजी पर काले तिल मिले हुए जल से 'ॐ नमः शिवाय' का उच्चारण करते हुए अभिषेक करना चाहिए।
- शनिदेव की प्रसन्नता के लिए जातक को शनिवार के दिन व्रत रखना चाहिए एवं गरीब लोगों की मदद करनी चाहिए,ऐसा करने से जीवन में आए संकट दूर होने लगते हैं।
- शनिदेव, हनुमानजी की पूजा करने वालों से सदैव प्रसन्न रहते हैं,इसलिए इनकी कृपा पाने के लिए शनि पूजा के साथ-साथ हनुमान जी की भी पूजा करनी चाहिए,शनिदोष से मुक्ति मिलती है।