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Shani Gochar 2025: साल 2025 में कष्टों से मुक्त हो जाएंगी ये राशियां, इन लोगों पर लगेगी साढ़े साती

Tue, 12 Nov 2024 03:32 PM IST
मेघा कुमारी ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Shani Rashi Parivartan 2025: सभी नौ ग्रह में शनि देव को न्याय का कारक माना गया है। शनि देव व्यक्ति को उसके कर्मों का फल प्रदान करते हैं। 
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Shani Gochar 2025 - फोटो : अमर उजाला
Shani Rashi Parivartan 2025: सभी नौ ग्रह में शनि देव को न्याय का कारक माना गया है। शनि देव व्यक्ति को उसके कर्मों का फल प्रदान करते हैं। शनि की साढ़ेसाती व्यक्ति के जीवन का एक ऐसा समय होता है जहां शनिदेव उसे न सिर्फ उसके कर्मों का फल प्रदान करते हैं बल्कि उसे अनुभवी भी बनाते हैं। हालांकि कई लोग साढ़े साती से घबराते भी हैं लेकिन ऐसा नहीं है। 
 
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Shani Gochar 2025 - फोटो : freepik
साल 2025 में जब शनि देव 29 मार्च को मीन राशि में प्रवेश करेंगे तो सभी राशियों पर उनका व्यापक प्रभाव आएगा। सबसे पहले बात करते हैं उस राशि की जो कि शनि देव की साढ़ेसाती के प्रभाव से मुक्त होने वाली है। मकर राशि के जातक साढ़े सात के बाद शनि देव की साढ़े साती के प्रभाव से मुक्त हो जाएंगे। इसके अलावा अब बात करते हैं उस राशि की जिस पर शनि की साढ़ेसाती शुरू होने वाली है। मेष राशि के जातकों के ऊपर शनि की साढ़ेसाती शुरू होने वाली है। 
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Shani Gochar 2025 - फोटो : अमर उजाला
जब शनि आपके चंद्रमा से द्वादश भाव में, लग्न भाव में और द्वितीय भाव में गोचर करता है तो उस साढे सात साल के समय को साढ़ेसाती का काल कहा जाता है।  मेष राशि के जातक अब अगले साढ़े सात साल तक शनि देव के प्रभाव में रहेंगे। इसके अलावा जो कुंभ राशि के जातक हैं उन जातकों का अंतिम चरण शुरू हो जाएगा यानी कि अब उनके जीवन के सिर्फ ढाई वर्ष साढ़ेसाती के बचने वाले हैं। 

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Shani Gochar 2025 - फोटो : अमर उजाला
इसके अलावा अगर मीन राशि की बात करें तो शनि देव जब 29 मार्च को मीन राशि में प्रवेश करेंगे तो मीन राशि के जातकों के लिए शनिदेव की ढैया मध्य चरण में प्रवेश करेगी। यानी की अभी उन्हें पांच साल और शनि देव की ढैया के समय का सामना करना है। 
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Shani Gochar 2025 - फोटो : अमर उजाला
शनिदेव के बुरे फल से बचने के लिए व्यक्ति को हनुमान जी की सेवा करनी चाहिए। काले कुत्ते की सेवा करनी चाहिए। काल भैरव की आराधना करनी चाहिए। उड़द की दाल का हर शनिवार को दान करना चाहिए। पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाना चाहिए। हर अमावस्या को अपने पितृ देवों को भोग लगाकर उन्हें प्रसन्न भी करना चाहिए।
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