शनि के गोचर से कर्क राशि वालों पर प्रभाव
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वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शनि को सबसे धीमी चाल से चलने वाला ग्रह माना गया है। यह एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं। इस तरह से पूरी राशि चक्र का चक्कर पूरा करने में 30 सालों का समय लगता है। न्यायप्रिय और कर्मफलदाता शनि इस समय गुरू के स्वामित्व वाली राशि मीन में विराजमान हैं। शनि इस राशि में साल 2027 तक रहेंगे फिर इसके बाद मेष राशि में गोचर करेंगे। शनि के मीन राशि में गोचर करने से सभी 12 राशियों के ऊपर प्रभाव देखने को मिल रहा है। शनि के मीन राशि में साल 2027 तक रहने के कारण मीन राशि के जातकों पर किस तरह का प्रभाव देखने को मिलेगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।
शनि मीन राशि में कब से कब तक रहेंगे
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि देव 29 मार्च 2025 को सुबह 11 बजे गुरु के स्वामित्व वाली राशि मीन में प्रवेश कर चुके हैं और अपनी यात्रा को मीन राशि में जारी किए हुए हैं। शनि इस राशि में 3 जून 2027 तक रहेंगे।
शनि के गोचर से कर्क राशि वालों पर प्रभाव
कर्क राशि के जातकों के लिए शनिदेव सातवें और आठवें भाव होते हैं और जब मीन राशि में इनका गोचर हुआ है तो यह आपके नवम भाव में विराजमान हैं। कुंडली का नवम भाव भाग्य का भाव होता है। वहीं कर्क राशि वालों पर चल रही शनि की ढैय्या अब खत्म हो गई है। ऐसे में कर्क राशि के जातकों के रूके हुए काम जल्द पूरे होंगे। कार्य में सफलता मिलने के अच्छे योग हैं। आर्थिक संपन्नता में इजाफा होगा। अधूरे कामों में तेजी आएगी।
शनि के मीन राशि में गोचर करने से कर्क राशि वालों से शनि की ढैय्या अब खत्म हो गई है जिसे आपको कुछ राहत महसूस होगी। शनिदेव आपके भाग्य के भाव यानी नवम भाव में गोचर करने से अपनी तीसरी द्दष्टि लाभ के भाव में रख रहे हैं। जिससे कुछ नए कामों की शुरुआत हो सकती है। नई योजनाओं में कामयाबी मिल सकती है। जो लोग किसी के साथ बिजनेस में पार्टनर में उनको लाभ मिल सकता है। वहीं दूसरी तरफ शनि की सातवीं द्दष्टि आपके तीसरे भाव में हैं ऐसे में आपके पराक्रम में वृद्धि होगी और शनि की दसवीं द्दष्टि से आपके छठे भाव में पड़ने से आपको रोगों से मुक्ति और आप अपने शत्रुओं पर भारी रहेंगे।