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Shani Gochar 2025: शनिदेव करेंगे 30 साल बाद मीन राशि में गोचर, जानें मकर राशि पर कैसा होगा असर ?

Wed, 19 Mar 2025 04:43 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Shani Gochar 2025: शनि सबसे धीमे चलने वाले ग्रह हैं और यह एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं फिर इसके बाद राशि परिवर्तन करते हैं। 
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Shani Gochar 2025: 29 मार्च को शनि का गोचर मीन राशि में होगा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Shani Gochar 2025: वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनिदेव हर ढाई साल बाद एक से दूसरी राशि में गोचर करते हैं। इस तरह से सभी 12 राशियों का एक चक्कर लगाने में शनिदेव को 30 वर्षों का समय लगता है। शनि अभी अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में हैं। 29 मार्च को शनि मीन राशि में गोचर करेंगे। आइए जानते हैं शनि के मीन राशि में गोचर करने से मकर राशि वालों पर कैसा पड़ेगा असर। 
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मकर राशि पर शनि के गोचर का प्रभाव
शनि के गोचर करने से मकर राशि वालों पर चल रही शनि की साढ़ेसाती खत्म हो जाएगी। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मकर राशि वालों के लिए शनि पहले और दूसरे भाव के स्वामी होकर 29 मार्च के बाद तीसरे भाव में गोचर करने वाले हैं। कुंडली के इस भाव में शनिदेव अच्छे फल देने के लिए बाध्य होते हैं। कुंडली का यह भाव छोटी यात्राओं और पराक्रम के लिए होता है। शनिदेव इस भाव में विराजमान शनिदेव की दृष्टि आपके पंचम नवम और द्वादश भाव पर होगी। मकर राशि के जातकों के लिए शनि का यह राशि परिवर्तन बहुत अच्छा रहेगा। इससे भाग्य का साथ मिलेगा। नौकरीपेशा जातकों को इससे फायदा होगा। और कारोबार शुरू करना चाहते हैं तो उसमें भी आपको सफलता प्राप्त हो सकती है। 

ज्योतिष में शनि का महत्व
वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शनि को सबसे अहम और शक्तिशाली ग्रह माना गया है। शनि न्याय, कर्म, मेहनत, पीड़ा, कष्ट, संघर्ष और धैर्य के कारक ग्रह होते हैं। सभी नवग्रहों में कर्मफलदाता शनि सबसे धीमी चाल से चलने वाले ग्रह हैं। यह किसी एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं, इस तरह से सभी 12 राशियों का एक चक्कर को पूरा करने के लिए शनि 30 वर्ष का समय लेते हैं। शनि सभी ग्रहों में सबसे शक्तिशाली और प्रभावी इसलिए होते हैं क्योंकि यहीं एकमात्र ग्रह हैं जिनके पास साढ़ेसाती और ढैय्या है। हर एक जातकों के जीवन में शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का व्यापक असर पड़ता है।
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आमतौर पर शनि का नाम आते ही लोगों के मन में डर बैठ जाता है कि शनि की टेढ़ी नजर न पड़ जाए, लेकिन शनि एक न्यायप्रिय ग्रह हैं जो लोगों को उनके कर्मों के आधार पर ही शुभ या अशुभ फल प्रदान करते हैं। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार की द्दष्टि अगर किसी पर पड़ जाय तो उसका कुछ न कुछ अनिष्ट जरूर होता है। शनि को मकर और कुंभ राशि का स्वमित्व प्राप्त है। ये तुला राशि में उच्च के होते हैं जबकि मेष राशि में नीच के होते हैं। शनि की बुध, शुक्र और राहु के साथ मित्रता रहती है जबकि सूर्य, चंद्रमा और मंगल के साथ इनका शत्रुवत व्यवहार होता है। जबकि देवगुरु बृहस्पति और केतु से इनका संबंध सम रहता है।
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आपको बता दें कि न्याय के देवता शनि इस साल 29 मार्च को अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ से निकलकर देवगुरु बृहस्पति की राशि मीन में प्रवेश करेंगे। शनि के मीन राशि में गोचर करने से कुछ राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और कंटक शनि की पनौती से छुटकारा मिल जाएगा वहीं कुछ राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या शुरू हो जाएगी। 

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