Shani Vakri 2025: सबसे धीमी चाल से चलने वाले ग्रह शनि अब मीन राशि में रहते हुए वक्री हो चुके हैं। शनिदेव 13 जुलाई से लेकर 28 नवंबर तक मीन राशि में वक्री रहेंगे, फिर इसके बाद मार्गी हो जाएंगे। शनिदेव 138 दिनों तक वक्री रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को न्यायाधिपति और कर्मफलदाता माना जाता है। शनिदेव मकर और कुंभ राशि के स्वामी होते हैं और यह तुला राशि में उच्च के होते हैं। शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव लोगों के ऊपर काफी समय तक रहता है। शनि एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं फिर इसके बाद दूसरे राशि में गोचर करते हैं। शनि के वक्री होने से आइए जानते हैं वृश्चिक राशि के जातकों के ऊपर किस तरह का प्रभाव देखने को मिलेगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।
वृश्चिक राशि पर शनि के वक्री का प्रभाव
शनि ग्रह वृश्चिक राशि वालों के लिए उनकी कुंडली के तीसरे और चौथे भाव के स्वामी हैं और अब शनि के वक्री होने पर यह आपके पांचवें भाव में है। शनि का पंचम भाव में गोचर होना आमतौर पर अच्छा नहीं माना जाता है। ऐसे में कुछ मामलों में आपको परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आपको इस दौरान कुछ योजनाओं पर अधिक सावधानी बरतनी होगी। संतान की पढ़ाई से संबंधित मामलों में आपको सावधानी बरतनी होगी। आपको इस दौरान अपने खान-पान पर धैर्य और संयम रखना होगा।
Shani Vakri: शनि हुए वक्री, इन राशियों के दिन फिरेंगे और मिलेगी हर काम में सफलता
Mangal Gochar: कन्या राशि में मंगल का गोचर, इन राशियों को मिलेगा धन और सफलता का वरदान
ज्योतिष में शनि ग्रह
- ज्योतिष में शनि ग्रह को बहुत ही खास महत्व महत्व दिया जाता है। कालपुरुष की कुंडली न्याय के कारक शनिदेव मकर और कुंभ राशि के स्वामी ग्रह हैं। जहां पर यह दसवें और एकादश भाव पर अधिकार रखते हैं। ज्योतिष शास्त्र में कुंडली का दशम भाव कर्म का और इससे अगला भाव फल को दिखाता है। इस कारण से शनिदेव को कर्म फल दाता माना जाता है।
- कुंभ राशि शनिदेव की मूल त्रिकोण राशि होत है। मेष राशि में नीच के और तुला राशि में उच्च के होते हैं।
- शनिदेव मेहनत करने वाले श्रमिक और गरीबों के देवता हैं। जो व्यक्ति गरीबों और कमजोर वर्ग की मदद करते हैं उनको शनिदेव परेशान नहीं करते हैं।
- शनिदेव लोहा, खदान, खनिज, तेल, कबाड़ और औजारों के कारक ग्रह होते हैं। शनिदेव अनुराधा, पुष्य और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी होते हैं।