फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Punarvasu Nakshatra: अपने जीवनसाथी के प्रति वफादार होते हैं इस नक्षत्र में जन्में लोग

Tue, 27 Aug 2024 01:02 PM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Punarvasu Nakshatra: ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि जिस व्यक्ति का जन्म पुनर्वसु नक्षत्र में होता है उनकी वाणी कोमल व मधुर होती है। इस नक्षत्र पर गुरू का प्रभाव होता है इसलिए इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति का शरीर भारी-भरकम होता है।
विज्ञापन
पुनर्वसु नक्षत्र - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Punarvasu Nakshatra: ग्रहों और नक्षत्रों का हमारे जीवन पर काफी शुभ प्रभाव पड़ता है। व्यक्ति का जन्म जिस नक्षत्र में हुआ है उसका प्रभाव उसके जीवन में देखने को मिलता है। ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि जिस व्यक्ति का जन्म पुनर्वसु नक्षत्र में होता है उनकी वाणी कोमल व मधुर होती है। इस नक्षत्र पर गुरू का प्रभाव होता है इसलिए इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति का शरीर भारी-भरकम होता है। इनकी याददाश्त बड़ी अच्छी होती।

विज्ञापन


27 नक्षत्रों में इसका स्थान सातवां है। ऐसी मान्यता है कि पुनर्वसु नक्षत्र में जिनका जन्म होता है उनमें कुछ दैवी शक्तियां होती है। समय-समय पर इन्हें ईश्वरीय कृपा का लाभ मिलता रहता है। अपने नेक और सरल स्वभाव के कारण यह समाज में मान-सम्मान और आदर प्राप्त करते हैं। पढ़ने-लिखने में यह काफी होशियार होते हैं।

पुनर्वसु नक्षत्र में जन्म लेने वालों का व्यक्तित्व
पुनर्वसु नक्षत्र के स्वामी ग्रह बृहस्पति और राशि स्वामी बुध हैं। इस नक्षत्र की देवी अदिति हैं। इस नक्षत्र पर गुरु का प्रभाव होने के कारण इसे शुभ माना जाता है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोग मेधावी और सदाचारी होने के साथ ही संतोषी होते हैं। ये आस्तिक होते हैं, यानी भगवान पर इनकी जबरदस्त आस्था होती है। ये परंपराओं के मानने वाले होते हैं। आर्थिक पहलू को देखें तो ये बचत करना नहीं चाहते हैं, लेकिन इनकी व्यवहार कुशलता और अन्य आदतों के कारण इन्हें हमेशा मान-सम्मान मिलता है। 

पुनर्वसु नक्षत्र के चरण 
पुनर्वसु नक्षत्र के प्रथम तीन चरण मिथुन राशि में स्थित होते हैं तथा चौथा चरण कर्क राशि में होता जिसके कारण इस नक्षत्र पर मिथुन राशि तथा इसके स्वामी ग्रह बुध और कर्क राशि तथा इसके स्वामी चन्द्रमा का भी प्रभाव पड़ता है।
विज्ञापन

पुनर्वसु नक्षत्र और विवाह 
पुनर्वसु नक्षत्र पर गुरु और बुध देव का शासन है और इसकी अधिष्ठात्री देवी अदिति हैं। यह नक्षत्र पालन-पोषण और सुरक्षा का प्रतीक है। इन नक्षत्रों के जातक रचनात्मक, बुद्धिमान और नवोन्मेषी माने जाते हैं, जो उन्हें बेहतरीन समस्या समाधानकर्ता बनाता है। वे सामंजस्यपूर्ण स्थान पर रहना पसंद करते हैं और अपने वातावरण को समृद्ध और सुखद बनाने का प्रयास करते हैं। वे शांत और मिलनसार व्यक्तित्व वाले होते हैं, पालन-पोषण करते हैं, जो उन्हें एक साथी के रूप में उपयुक्त बनाता है। अपने संबंधों में यह व्यक्ति अपने पार्टनर के प्रति अत्यंत वफादार और समर्पित होते हैं और अपनी प्रतिबद्धताओं को गंभीरता से लेते हैं।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें