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नरेंद्र मोदी जन्मदिन विशेष : जानें किन दशाओं में चमका भाग्य और किस योग ने दिलाया प्रधानमंत्री का पद

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PM Narendra Modi Kundali
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भारतीय संस्कृति पुनर्जन्म और कर्म सिद्धांत पर आधारित है। अनेक योनियों में जन्म लेने के बाद संचित पुण्यों के आधार पर हमें मानव जीवन मिलता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, हमारे सभी के जीवन में इसी प्रारब्ध के कारण नक्षत्र, तिथि, योग, पक्ष, कुंडली में ग्रहों की स्थिति और आने वाली दशाओं (जीवन का फल) का निर्धारण होता है।

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देश के वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का जन्म 17.9.1950 को, वडनगर (गुजरात) में अनुराधा नक्षत्र और वृश्चिक लग्न/राशि में हुआ था। इनके लग्न में मंगल और चंद्र हैं, जो चंद्र-मंगल लक्ष्मी योग बना रहे हैं। चतुर्थ भाव में धनेश और पंचमेश बृहस्पति हैं। पंचम भाव में राहु, दशम भाव (कर्म, यश) में तृतीयेश और चतुर्थेश शनि, सप्तमेश एवं द्वादशेष शुक्र हैं। एकादश भाव (लाभ, बड़े भाई-बहन) में केतु, सूर्य और वक्री एवं अस्त बुध हैं।

मोदीजी का जन्म शनि/शुक्र/राहु की दशा में हुआ है। शास्त्रों के अनुसार, अनुराधा नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में बहुत संघर्षों एवं चुनोतियों का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण वे दृढ़ निश्चयी, ऊर्जावान, उत्साहित, तेज-तर्रार, आशावादी, प्रभावशाली और कठोर प्रवृत्ति के हो जाते हैं और उनको जीवन के 50 वर्ष के बाद सुख प्राप्त हो पाता है।
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सुख के चतुर्थ भाव और पंचम भाव (शिक्षा, विवेक/बुद्धि) और उनके स्वामी बृहस्पति, सब पाप ग्रहों से पीड़ित हैं, साथ ही लग्न, बृहस्पति की डिग्री, राहु-केतु के अत्यंत निकट है, माता/मन का कारक चंद्रमा, जोकि काल पुरुष की कुंडली (मेष लग्न) का सुखेश होता है, षष्ठेश (रोग, ऋण, शत्रु, रुकावट, संघर्ष) मंगल से पीड़ित है और नीच का होकर, इनके प्रारंभिक शिक्षा और जीवन को साधारण और संघर्षमय बनाता है।

एकादश भाव में तीन ग्रह, इनके कई भाई-बहनों का कारण बनते हैं। नीच का नवमेश (भाग्य, पिता) और पिता का कारक सूर्य राहु-केतु से पीड़ित होने के साथ साथ वक्री एवं अस्त अष्टमेश बुध, जोकि लाभेश भी हैं, इसी भाव में होने के कारण भाई-बहनों और पिता का जीवन स्तर सामान्य होने का संकेत देते हैं।

विवाह/विवाहित जीवन के सप्तम भाव पर शनि-मंगल पाप ग्रहों की दृष्टि है, साथ ही विवाह के कारक और सप्तमेश शुक्र भी शनि के साथ हैं, जो इनके विवाह होने की पुष्टि, परन्तु उसके न सफल होने का संकेत देते हैं। नवमांश भी इसकी पुष्टि करता है।

इनके दशम भाव में सूर्य की सिंह राशि है और इसमें प्रजातंत्र का कारक शनि है, साथ ही शनि तृतीयेश (प्रचार) और चतुर्थेश (सिंहासन) भी हैं और इनका जन्म भी शनि के नक्षत्र अनुराधा में हुआ है, अतः प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक परिस्थितियां कैसी भी हों, प्रारब्ध ने इनका एक प्रचारक से राजनीतिक जीवन का सफर जन्म से ही निश्चित कर दिया था।

केतु/शनि की दशा (1984) में, इन्होंने भाजपा में प्रवेश पाकर अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की। इसके बाद 1985-2005 तक इनको दशम भाव में स्थित शुक्र, जो शनि के साथ है और पंचमेश बृहस्पति से दृष्ट है, की पूरी 20 वर्ष की दशा मिली और इनको अनेक पदों से होते हुये मुख्यमंत्री पद तक पहुंचाया।

इसके पश्चात छः वर्ष (2011 तक) की दशमेश सूर्य, जोकि लाभेश भी हैं की दशा मिली, जिसने इनकी सफलता को निरंतर ऊंचाईयों पर जारी रखा। फिर 2011-2021 से दस वर्ष की आई भाग्येश चंद्र की दशा, जोकि लग्न में बैठकर राजयोग बना रहे हैं, इसने इनको देश के सबसे शक्तिशाली प्रधानमंत्री के पद पर पहुंचाया।

इनकी कुंडली में पंचम भाव (विवेक, बुद्धि) और कारक बृहस्पति दोनों पाप ग्रहों के प्रभाव में और उन्माद योग बना रहे हैं, आत्मा और राजनीति का कारक सूर्य भी राहु-केतु से पीड़ित है। लग्नेश मंगल, जोकि षष्ठेश भी हैं, लग्न में बैठकर, राजनैतिक विरोधियों को पराजित करने की शक्ति और कूटनीति प्रदान कर रहे हैं। शनि-सूर्य की नजदीक डिग्री और पीड़ित सूर्य, अहं तत्व को बढ़ाते हैं। नीच का मन का कारक चंद्रमा, इनको गलत सलाह, सोच और अनजाने भय के कारण गलत निर्णयों को लेने के लिये बाध्य कर सकता है।

लग्न में कला का स्वामी चंद्रमा, वाणी के द्वितीय भाव में शुभ राशि एवं इसके स्वामी बृहस्पति पर प्रचार-प्रसार भाव के स्वामी शनि उहापोह के कारक शुक्र और क्रूर ग्रह मंगल की दृष्टि, इनको एक मजबूत और कटाक्ष करने वाली भाषण शैली का धनी बनाता है।

इस तरह देखें तो ज्योतिष के अनुसार, कुंडली में उपस्थित योग से ज्यादा, व्यक्ति के जीवन में आने वाली दशायें (कर्मफल) ही, उसकी उन्नति/अवनति की दिशा निर्धारित करती हैं।

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