वैदिक ज्योतिष के अनुसार इस वर्ष मार्च का महीना बहुत ही खास रहने वाला है। मार्च माह में कई तरह के ज्योतषीय संयोग का निर्माण होने वाला है। मार्च माह में कई ग्रहों के गोचर से देश-दुनिया के साथ सभी 12 राशियों के जातकों पर इसका प्रभाव देखने को मिलेगा। दरअसल इस वर्ष 30 साल बाद 29 मार्च को एक साथ चार महासंयोग की घटना घटित होगी। आइए जानते है मार्च माह में कौन-कौन सा विशेष संयोग देखने को मिलेगा।
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पहला संयोग- मीन राशि में शनि योग
वैदिक ज्योतिष में शनि ग्रह का विशेष महत्व होता है। शनि सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह होते हैं और यह एक से दूसरी राशि में गोचर करने करने के लिए ढाई वर्षो का समय लेते हैं। इस वर्ष शनि का गोचर होना है। शनिदेव 29 मार्च को अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ की यात्रा को विराम देते हुए गुरु की राशि मीन में प्रवेश करेंगे। शनि का गोचर 29 मार्च को रात 11 बजे यानी शनि का मीन राशि में प्रवेश का असर 30 मार्च से दिखाई देना शुरू हो जाएगा। वहीं इसी दिन शनि और सूर्य की युति भी बनेगी।
दूसरा संयोग-सूर्य ग्रहण
इस साल का पहला सूर्य ग्रहण 29 मार्च को है। शनि का गोचर मीन राशि और सूर्य का कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में गोचर करने से सूर्य-शनि की युति होगी। इस तरह से सूर्य ग्रहण मीन राशि में होगा। वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार 29 मार्च को पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा और इस दिन चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर रहेगा। भारतीय समयानुसार सूर्य ग्रहण दोपहर 02 बजे से शुरू होगा।
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तीसरा संयोग- चैत्र नवरात्रि
वहीं मार्च माह के अंतिम दिनों में मतांतर से चैत्र नवरात्रि 29 मार्च 2025 से प्रारंभ हो रहा है। लेकिन उदयातिथि के अनुसार चैत्र प्रतिपदा तिथि 29 मार्च को सुबह 06 बजकर 57 मिनट से प्रारंभ होगी जो 30 मार्च को सुबह 03 बजकर 19 मार्च को खत्म हो रही है।
चौथा संयोग- गुड़ी पड़वा
चैत्र नवरात्रि से नया हिंदूवर्ष शुरू होता है, जिसे गुड़ी पड़वा के नाम से भी जाना जाता है। गुड़ी पड़वा 30 मार्च को मनाया जाएगा। इस तरह से 29 से 30 मार्च का समय ऐसे है जिसमें 2 बड़ी खगोलीय घटना घटित होगी और 2 प्रमुख त्योहार भी मनाए जाएंगे। इसके अलावा जब सूर्य मीन राशि में गोचर करेंगे तब सभी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य थम जाते हैं।