Mangal Gochar 2025: 28 जुलाई 2025 को मंगल कन्या राशि में गोचर करने वाले हैं। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को रक्त, साहस, भूमि, भवन, साहस, पराक्रम और युद्ध का कारक ग्रह माना जाता है। मंगलदेव कन्या राशि में गोचर करने के बाद 13 सितंबर 2025 को तुला राशि में प्रवेश कर जाएंगे। मंगल के कन्या राशि में गोचर करने से देश-दुनिया समेत सभी 12 राशियों के जातकों पर विशेष प्रभाव देखने को मिलेगा। आइए जानते हैं मंगल के कन्या राशि में गोचर करने से मेष राशि वालों के ऊपर किसी तरह का असर देखने को मिलेगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।
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मेष राशि पर मंगल के गोचर का प्रभाव
मेष राशि के जातकों के लिए मंगल पहले और आठवें भाव के स्वामी होते हैं। 28 जुलाई को ग्रहों के सेनापति माने जाने वाले मंगल मेष के जातकों के छठे भाव में गोचर करेंगे। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली का छठा भाव शत्रु, रोग और प्रतिस्पर्धा का कारक माना जाता है। मंगल का छठे भाव में होना बहुत ही अच्छा और अनुकूल माना जाता है। मंगल को अशुभ ग्रह माना जाता है और छठा भाव कुंडली का अच्छा भाव नहीं माना जाता है। ऐसे में अशुभ घर में अशुभ ग्रह का होना शत्रुहंता योग बनाता है। इस भाव में शत्रु का होना मंगल के प्रभाव के कारण आपको नुकसान नहीं पहुंचा सकता है। इस दौरान जो छात्र किसी प्रतियोगी परीक्षा दे रहे हैं उनको इसमें अच्छी सफला मिल सकती है। जिन लोगों का अगर कोर्ट-कचहरी में कोई वाद-विवाद चल रहा है तो उसमें फैसला आपके पक्ष में आ सकता है।
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ज्योतिष में मंगल ग्रह का महत्व
- वैदिक ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह
को एक क्रूर ग्रह माना जाता है।
- मंगल ग्रह को सभी ग्रहों में सेनापति का दर्जा प्राप्त है।
- मंगल ग्रह मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी ग्रह होते हैं।
- भूमिपुत्र मंगल मकर राशि में उच्च के होते हैं, जबकि कर्क राशि में नीच के होते हैं।
- मृगशिरा, चित्रा और धनिष्ठा नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह होते हैं।
- जिन जातकों की कुंडली मंगल शुभ स्थान पर और शुभ ग्रहों को प्रभाव में होते हैं ऐसा व्यक्ति बहुत ही निडर और साहसी होता है।
- मंगल ग्रह के अशुभ स्थिति में होने पर जातक को कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है।
- कुंडली में मंगल दोष होने पर व्यक्ति का दांपत्य जीवन बहुत अच्छा नहीं माना जाता है।