मंगल का तुला राशि में गोचर और वृषभ राशि पर प्रभाव
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Mangal Gochar 2025: वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मंगल ग्रह करीब 45 दिनों के अंतराल पर अपनी राशि बदल लेते हैं। ज्योतिष में मंगल ग्रह को ऊर्जा, पराक्रम, जोश, रक्त, युद्ध और भूमि का कारक ग्रह माना जाता है। मंगल ग्रह का संबंध अग्नि से होता है इस कारण से इसमें ऊर्जा और इच्छा शक्ति का प्रभाव बहुत ही जाता होता है। मंगल दो राशियां का स्वामित्व प्राप्त है मेष और वृश्चिक। मंगल के जन्म कुंडली में शुभ स्थान पर होने पर व्यक्ति को साहस के बल पर कठिन से कठिन काम को भी बड़ी ही आसानी के साथ पूरा करता है। इसके दूसरी तरफ जब कुंडली में मंगल अशुभ स्थान पर विराजमान हैं या मंगल राहु, केतु और शनि से पीड़ित है तो व्यक्ति बहुत ही गुस्सैल और उसमें धैर्य की कमी आ जाती है। व्यक्ति के साथ दुर्घटना होने का शिकार होता है। प्रॉपर्टी से जुड़े विवाद लगातार बने रहते हैं।
13 सितंबर को मंगलदेव रात 08 बजकर 18 मिनट पर तुला राशि में गोचर करेंगे। आपको बता दें कि मंगल तुला राशि में शत्रु राशि मानी जाती है। मंगल के तुला राशि में गोचर करने से देश-दुनिया के साथ-साथ सभी 12 राशियों के जातकों पर भी प्रभाव देखने को मिलेगा। आइए जानते हैं मंगल के तुला राशि में गोचर करने से वृषभ राशि के लोगों पर किस तरह का प्रभाव देखने को मिलेगा, इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।
वृषभ राशि पर मंगल के गोचर का प्रभाव
वृषभ राशि के जातकों के लिए मंगल का गोचर आपके सातवें और बारहवें भाव के स्वामी होते हैं और 13 सितंबर को मंगल का तुला राशि में गोचर करने से वृषभ राशि के जातकों के यह छठे भाव में गोचर होंगे। कुंडली का छठा भाव कर्ज, बीमारियों और परेशानियों से संबंध रखता है। ऐसे में इस दौरान कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इस दौरान आपकी कुछ योजनाओं को पूरा करने में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आपके खर्चों में वृद्धि हो सकती है। जो लोग किसी व्यवसाय से संबंधित है उनको व्यापार में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।