रंग - सुन्दर, जीवन्त, आकर्षक होने के अलावा हमारे जीवन का अभिन्न अंग हैं। रंग किसी भी व्यक्ति की प्रकृति, मानसिकता, शरीर और आत्मा पर निश्चित रूप से प्रभाव डालते हैं।
सूर्य: पीला रंग हल्की लाली लिए हुए
चन्द्रमाः सफेद
मंगलः लाल
बुधः हरा
बृहस्पतिः भगवा (सुनेहरा पीला)
शुक्रः सफेद
शनिः काला और नीला
राहूः काला, कत्थई
केतुः धुंधला कत्थई
लाल रंग
लाल रंग उत्साह, उमंग और जवानी को प्रदर्षित करता है। यह रंग उत्तम स्वास्थ्य का भी द्योतक है। ज्योतिष में भी रंगो का विस्तार से अध्ययन हुआ है। लाल रंग का प्रतिनिधित्व ग्रह मंगल करता है। लाल रंग ऊर्जा से परिपूर्ण और शुभ माना जाता है। धन की देवी, लक्ष्मी लाल रंग के कपड़ो से सुसज्जित रहती है। इसीलिए यह रंग प्रचुर मात्रा में धन और सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति को दर्शाता है। भारतीय शादीशुदा औरतें अधिकतर ‘सिन्दूर’ (रंग में लाल) प्रयोग करती है जो सौभाग्यशाली होने का द्योतक है। माथे पर ‘टीका’ लगाना भी एक दूसरी भारतीय परंपरा है जो या तो धार्मिक उत्सव या युद्ध जीतने के बाद के रूप में मनायाी जाती है।
सैफरॉन (भगवा) रंग
इस रंग को शुद्धता और पवित्रता से परिपूर्ण माना जाता है। धार्मिक रूप से प्रचुर मात्रा में उपयोग होने के अतिरिक्त इस रंग की अत्यधिक आध्यात्मिक महत्ता है। यह रंग व्यक्ति को बहुत अधिक ऊर्जा प्रदान करता है और आलस्य को भगाता है। भगवा कलर को त्याग और गंभीर विचारों की अभिव्यक्ति वाला माना जाता है।
पीला रंग
यह रंग बौद्धिकता के उच्च स्तर को दर्शाता है। पीले रंग में ज्ञान की सारी सीमाओं को पार करने की क्षमता है और व्यक्तियों अपने अन्दर सम्पूर्ण शान्ति खोजने में मदद करता है। भारतीय देवता विशेषकर विष्णु, गणेश, कृष्ण आदि पीले कपड़ों से सुसज्जित हैं। इस रंग का स्वामी वृहस्पति ग्रह है।
हरा रंग
हरा रंग प्रकृति में बहुतायत में उपलब्ध है। यह रंग प्रसन्नता, अच्छे स्वास्थ्य, खुशी और शान्ति का द्योतक है। हरा रंग लगातार परिवर्तन और किशोरावस्था को प्रदर्शित करता है। इस रंग का प्रतिनिधित्व बुध ग्रह करता है।
नीला रंग
ब्लू कलर अनन्त का द्योतक है जहां सभी सीमाएं समाप्त हो जाती हैं और इस रंग का रहस्य प्रभुत्व में आ जाता है। यह रंग धैर्य, कर्मठता, षान्ति और अज्ञात को जानने की बुद्धिमत्ता का इंगित करता है। सभी हिन्दू देवताओं के शरीर को इस रंग से दर्शया गया है। यह रंग इस यूनीवर्स के रहस्य की बहुलता का भी अभिन्न अंग है। शनि इस रंग का स्वामी है।
सफेद रंग
जब सामान्य आंखे रंगों के मध्य अन्तर न कर पायें तो व्हाईट कलर प्रभुत्व में आता है। विज्ञान इसमें विश्वास करता है। पारदर्शी होने के बावजूद यह रंग शुद्धता, सफाई, ज्ञान और बुद्धिमत्ता आदि को दर्शाता है। यदि हम हिन्दू देवी ‘सरस्वती’ की पिक्चर का अवलोकन करें तो वे श्वेत वस्त्र और गहनों से सुन्दतापूर्वक सुसज्जित हैं। चन्द्र इस रंग के स्वामी है।
आयुर्वेद ने भी रंगो को बहुत अधिक महत्व दिया है। आयुर्वेदिक चिकित्सा में बहुत से नगों की भस्म जैसे - माणिक, हीरा, पन्ना, पुखराज, मोती आदि का प्रयोग बहुतायत में होता है। आयुर्वेद विश्वास करता है कि शरीर में वात, पित्त और कफ के असंतुलन से व्यक्ति रोगी हो जाता है। शरीर की इन कमियों को दूर करने के लिए आयुर्वेद अपनी साधारण आयुर्वेदिक चिकित्सा के अतिरिक्त रंगो और नगों की भस्म के उपयोग की सलाह देता है।