कन्या :
चतुर्थ एवं सप्तमेश गुरु का तृतीय स्थान मे होना तथा उदित होकर पर उसका मजबूत होना, संबंधों में कटुता का सूचक है। जीवनसाथी के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है तथा माता एवं बहन से वैचारिक मतभेद हो सकते हैं। विपरीत लिंगी संबंधों में आकर्षण बिना वजह की तनाव में वृद्धि कर सकता है। भावनाओं पर संयम रखें। अनावश्यक व्यय पर नियंत्रण करें।
उपाय: दाल, गेहूं, हल्दी, वस्त्र एवं वस्त्र का प्रत्येक बृहस्पतिवार को किसी ब्राह्मण को दान करने का प्रयास करें और दक्षिणा दें।