वृषभ राशि पर गुरु के गोचर का प्रभाव
वृषभ राशि वालों के लिए देवगुरु बृहस्पति आठवें और ग्यारहवें भाव के स्वामी होते हैं और यह आपकी राशि से दूसरे भाव यानी धन के भाव में गोचर करने जा रहे हैं। गुरु का धन के भाव में गोचर आपके जोश, उत्साह, और आत्मविश्वास में वृद्धि करवाएगा। लेकिन इस बीच आपके पारिवारिक संबंधों में कुछ कडवाहट का सामना करना होगा। इस दौरान धन का बचत करने में आपको मुश्किलों का सामना करना होाग। लेकिन इसी बीच आपको पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों में थोड़ा बहुत मुनाफा कमा सकते हैं, क्योंकि देवगुरु बृहस्पति की द्दष्टि आपके छठे, आठवें और दसवें भाव पर पड़ेगी जिससे आपको लाभ मिल सकता है। गुरु के वक्री होने से आपको उन्नति प्राप्ति करने में संघर्षों का सामना करना पड़ सकता है। इस दौरान धार्मिक कार्यों में आपका मन लगेगा।
ज्योतिष में गुरु ग्रह का महत्व
- वैदिक ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति को गुरु का दर्जा प्राप्त है।
- गुरु धनु और मीन राशि के स्वामी होते हैं।
- कर्क राशि में गुरु उच्च के होते हैं जबकि मकर राशि में गुरु नीच के होते हैं।
- गुरु बृहस्पति को तीन विशेष द्दष्टियां प्राप्त है। पांचवी, सातवीं और नौवीं द्दष्टि।
- वैदिक ज्योतिष में गुरु बड़े भाई, शिक्षा, धन, संतान, ज्ञान और शिक्षा के कारक होते हैं।
- गुरु बृहस्पति पुनर्वसु, विशाखा और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्रों के स्वामी होते हैं।
- जिन जातकों की कुंडली के पहले भाव यानी लग्न में गुरु स्वयं बैठ जाएं तो व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली और ज्ञानी होता है।
- कालपुरुष की कुंडली में गुरु नौवें और बारहवें भाव के स्वामी होते हैं और यह दूसरे, पांचवें, नौवें,दसवें और ग्यारहवें भाव के कारक होते है।
- गुरु के दूसरे भाव में यानी धन के भाव में होने पर जातक बहुत धनी और समृद्धिशाली रहता है।
-जब गुरु कुंडली के पांचवें भाव में होते हैं या फिर पाचवें भाव पर द्दष्टि डालते हैं तो जातक को उच्च शिक्षा और गुणी संतान की प्राप्ति होती है।
- नवम भाव में गुरु के होने पर व्यक्ति शिक्षा और ज्ञान में परांगत होता है। कुंडली का दशम भाव कार्यक्षेत्र, करियर या पेशे का होता है दशम में गुरु हो तो व्यक्ति समाज में खूब प्रतिष्ठा प्राप्त करने वाला होता है।
- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली का ग्यारहवां भाव आय और लाभ का होता है। गुरु के इस भाव में होने पर जातक बहुत धन अर्जित करने में कामयाब होता है।
- गुरु के कमजोर होने पर जातक को लीवर, किडनी, मधुमेह, पीलिया, मोटापा और कैंसर जैसी बीमारी होने का खतरा रहता है।
- गुरु का रत्न पुखराज होता है। केले के वृक्ष को गुरु के रूप में पूजा जाता है। बृहस्पति गुरु पीले रंग का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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