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Budh Gochar 2026: बुध का कुंभ राशि में परिवर्तन, जानें मिथुन राशि वालों पर कैसा पड़ेगा प्रभाव ?

Sun, 01 Feb 2026 07:04 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Budh Gochar 2026: बुध ग्रह को ग्रहों का राजकुमार माना जाता है। 03 फरवरी को बुध मकर राशि की  की अपनी यात्रा समाप्त करके कुंभ राशि में प्रवेश करने वाले हैं।
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बुध गोचर 2026 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वैदिक ज्योतिष में बुध ग्रह को राजकुमार का दर्जा हासिल है। बुध बुद्धि, वाणी, व्यापार, संचार, गणित और त्वचा आदि का कारक ग्रह है। बुध देव को शुभ ग्रह माना जाता है। चंद्रमा के बाद बुध देव दूसरे ऐसे ग्रह हैं जो जल्दी-जल्दी राशि बदलने वाले ग्रह हैं। बुध ग्रह 03 फरवरी 2026 को रात 09 बजकर 38 मिनट पर कुंभ राशि में गोचर करेंगे। आइए जानते हैं बुध के कुंभ राशि में गोचर करने से मिथुन राशि वालों पर कैसे पड़ेगा प्रभाव।
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मिथुन राशि पर बुध के गोचर का प्रभाव
  • मिथुन राशि के जातकों के लिए बुधदेव उनकी कुंडली में पहले और चौथे भाव के स्वामी हैं जो 03 फरवरी 2026 बुध  आपके नौवें भाव में प्रवेश करेंगे।
  • बुध का कुंभ राशि में गोचर होने से यानी आपके लग्न भाव के स्वामी का नवम भाव में जाना शुभ रहेगा।
  • बुध का कुंभ राशि में गोचर आपके भाग्य में वृद्धि और तरक्की लाएगा।
  • रिश्तों में मजबूती और संबंधों में गर्माहट के योग दिलाएगा।
  • करियर के संबंध में आपको कई तरह की यात्राएं करनी पड़ सकती है जिसमें आपको नए तरह के असरों की प्राप्ति होगी। 
  • आपकी योजनाओं की सराहना होगी और कार्यक्षेत्र में एक नई पहचान आपको मिलेगी।
  • बुध के गोचर करने से आपको ज्याद से ज्यादा धन कमाने के अवसर मिलेंगे। आर्थिक लाभ के मौके मिलेंगे। 
  • आपको बिजनेस पार्टनर का साथ और भरोसा मिलेगा। 
  • प्रेम जीवन में आप जीवनसाथी का भरपूर साथ मिलेगा।
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ज्योतिष में बुध ग्रह
  • - वैदिक ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को सबसे छोटा और शुभ ग्रह माना जाता है। 
  • - सभी नवग्रहों में बुध ग्रह को राजकुमार का दर्जा प्राप्त है। 
  • - बुधदेव को वाणी, व्यापार, गणित, तर्कशास्त्र, संचार, बुद्धि और त्वचा का कारक ग्रह माना जाता है। 
  • - ज्योतिष में बुध को द्विस्वभाव का ग्रह माना जाता है। यानी बुध ग्रह जिस ग्रह के साथ होते हैं उसकी के अनुसार फल प्रदान करते हैं। 
  • - मिथुन और कन्या राशि का स्वामित्व बुध देव को प्राप्त है। 
  • - बुध शुभ ग्रहों के साथ होने पर शुभ फल और अशुभ ग्रहों के साथ होने पर अशुभ फल प्रदान करते हैं। अगर बुध ग्रह शुक्र,गुरु और बली चंद्रमा के साथ हों तो अच्छे फल प्रदान करते हैं। वहीं पापी ग्रहों के साथ होने पर जैसे राहु-केतु, शनि, सूर्य और मंगल तो अशुभ फल प्रदान करते हैं। 
  • - बुध सूर्य के सबसे नजदीक रहने वाले ग्रह हैं, जिस कारण से यह बार-बार अस्त हो जाते हैं। 
  • - बुध ज्येष्ठा, आश्लेषा और रेवती नक्षत्र के अधिपति ग्रह होते हैं। 
  • - कुंडली में बुध के मजबूत होने पर व्यक्ति बुद्धिमान, कूटनीतिज्ञ और राजनीति में कुशल होता है। 
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