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Astrology: ज्योतिष से जान सकते हैं व्यक्ति का चरित्र, जानिए कौन से ग्रह होते हैं जिम्मेदार ?

Wed, 10 May 2023 01:04 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

वैदिक ज्योतिष के कुछ ग्रंथों में ऐसे नियम बताए गए हैं जिनके द्वारा व्यक्ति के चरित्र का बोध होता है।
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अगर किसी कुंडली में गुरु शुक्र शनि की युति हो तो जातक का चरित्र बेहद बलवान होता है। - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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किसी भी व्यक्ति के जीवन में उसके चरित्र का बड़ा महत्व होता है। वैदिक ज्योतिष के कुछ ग्रंथों में ऐसे नियम बताए गए हैं जिनके द्वारा व्यक्ति के चरित्र का बोध होता है। आइये जानते हैं कुछ नियम...
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1 - सूर्य-शनि, चंद्र-शनि या सूर्य-चन्द्रमा की युति वाले जातक कुछ अधीर होते हैं। ये अपने रिश्तों को मजबूती से नहीं संभाल पाते हैं। हालांकि इस युति में अगर गुरु भी शामिल हो तो जातक एक रिश्ते में टिक जाता है। 

2 - अगर किसी कुंडली में गुरु शनि या गुरु शुक्र की युति हो या आपस में एक दूसरे को देख रहे हों तो जातक का मन अच्छा होता है। वह अपने प्रेमी को धोखा नहीं देगा। 
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3 - अगर लग्न और सप्तम भाव में मंगल शुक्र विराजमान हैं तो जातक एक व्यक्ति से संतुष्ट नहीं होगा। इस युति में अगर गुरु शामिल हो तो यह युति अच्छी होगी वरना इस युति के फल अशुभ ही है। 

4 - मंगल शुक्र राहु अगर सप्तम या अष्टम भाव में हो तो निश्चित रूप से जातक के अनेक स्त्रियों से संबंध होंगे। स्त्री की कुंडली हो तो अधिक मित्रों वाली होगी। 

5 - विद्वानों का कहना है कि अगर किसी कुंडली में गुरु शुक्र शनि की युति हो तो जातक का चरित्र बेहद बलवान होता है। 

6 - सूर्य चंद्र शुक्र की युति हो या चन्द्र मंगल बुध की युति हो तो जातक तेजस्वी होने के बावजूद पर स्त्री में रूचि रखता है। 

7 - किसी कुंडली में बुध चंद्र शुक्र सप्तम में और लग्न में राहु हो तो जातक का चरित्र अच्छा नहीं होता है। ऐसा व्यक्ति अपनी पत्नी को भी गलत काम करने के लिए प्रेरित कर सकता है। 

8 - यदि लग्न का स्वामी, दूसरे और छठे भाव के स्वामी के साथ सप्तम भाव में पाप ग्रह के साथ हो तो ऐसा जातक निश्चित रूप से एक रिश्ते में नहीं रुक सकता है। 

9 - यही बुध शुक्र लग्न में विराजमान हो और सप्तम भाव से मंगल उस पर दृष्टि दे रहे है तो भी जातक का चरित्र संदेहपूर्ण होगा। 

10 - अगर सप्तम भाव में शुक्र दूसरे भाव के स्वामी के साथ विराजमान हो जाए और उस पर मंगल राहु की दृष्टि हो ऐसे पुरुष की कई स्त्रियों से घनिष्ट मित्रता होती है ,वह कामातुर रहता है।
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