कुछ तिथि, योग, नक्षत्र और विशेष ग्रहों की स्थिति में जन्म लेने को अशुभ माना जाता है। उन्हीं तिथि में एक है अमावस्या तिथि में जन्म लेना। जिस तरह पितृदोष होता है उसी तरह इसे अमावस्या दोष माना जाता है। इसी के साथ यदि कुंडली में सूर्य और चंद्र की युति है तब भी यह अमावस्या दोष बनता है। इस दोष का समाधान कर लेने से जातक का जीवन संघर्ष में नहीं रहता है।अमावस्या तिथि में जब अनुराधा नक्षत्र का तृतीय व चतुर्थ चरण होता है तो सर्पशीर्ष कहलाता है। सर्पशीर्ष में शिशु का जन्म दोषपूर्ण माना जाता है। हालांकि उस समय शुभ नक्षत्र हो तो दोष कुछ हद तक दूर हो जाते हैं।
सूर्य और चंद्र की युति का प्रभाव :-
वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुंडली में जब सूर्य और चंद्र एक ही भाव में हो तब भी इस दोष का निर्माण होता है। परंतु यह दोष अलग-अलग भाव अनुसार अलग-अलग फल देता है। उदाहरणार्थ प्रथम भाव में सूर्य चंद्र की युति है तो ऐसे जातक को अपने माता-पिता से कभी सुख नहीं मिलता और वाद-विवाद होता रहता है। दशम भाव में यह युति है तो जातक शारीरिक रूप से मजबूत तो होता है परंतु उसे अपने जीवन में अपमान झेलते रहना पड़ता है। भविष्य में स्त्री, पुत्र, कुल, धन आदि को लेकर हानि उठानी पड़ सकती है।
अमावस्या दोष का प्रभाव :-
- अमावस्या की तिथि को जन्म लेने वाले जातक का जीवन बहुत ही संघर्ष में गुजरता है।
- वह जैसे जैसे बड़ा होता जाता है घर-परिवार में आर्थिक संकट भी गहराता जाता है।
- अमावस्या में जन्मा बच्चा व्याकुल, अस्थिर, आत्मबल से कमजोर, आलसी आदि होता है।
- जातक का अपनी माता से मधुर संबंध नहीं रह पाता है।
- जीवन में घटना और दुर्घटना का योग बना रहता है।
- शारीरिक और मानसिक रोग होने की संभावना रहती है।
- करियर के क्षेत्र में कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
लाल किताब के अचूक उपाय:-
- श्राद्ध कर्म करते रहने से भी यह दोष दूर हो जाता है।
- चंद्र के उपाय करना चाहिए। जैसे सोमवार करना और मंदिर में चंद्र से संबंधित वस्तुओं का दान करना।
- हमेशा सफेद रंग का रूमाल अपने पास रखें।
- अधिकतर मौकों पर सफेद वस्त्र पहनना चाहिए।
- काले, नीले, मेहरून और कत्थई रंग से बचना चाहिए।
- मोती पहनना चाहिए।
- पक्षियों को चावल या सफेद ज्वार डालना चाहिए।
- थोड़े से सौंफ लेकर भूमि में दबाना चाहिए।
- घर में चांदी की थाली रखें। चांदी के गिलास से पानी पिएं।
- रात में दूध का सेवन न करें।
- प्रतिदिन माता के पैर छूना चाहिए।
- पानी या दूध को साफ पात्र में सिरहाने रखकर सोएं और सुबह कीकर के वृक्ष की जड़ में डाल दें।
- चावल, सफेद वस्त्र, शंख, वंशपात्र, सफेद चंदन, श्वेत पुष्प, चीनी, बैल, दही और मोती आदि का दान करना चाहिए।
नोट : उपाय करने के पूर्व किसी लाल किताब के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।