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Shani Dosh: शनि दोष से बचने के लिए रखें शरीर के इन 3 अंगों का ध्यान

Wed, 19 Apr 2023 12:47 PM IST
विनोद शुक्ला शैली प्रकाश

सार

वैदिक ज्योतिष शास्त्र और लाल किताब के अनुसार ग्रह नक्षत्र हमारे शरीर के अंगों पर प्रभाव डालते हैं। ग्रहों के कारण ही हम रोग ग्रस्त होते हैं और उसी के कारण स्वस्थ भी।
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शनिदेव के दिव्य मंत्र ‘ऊं प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:’ का जप करने से प्राणी भयमुक्त रहता है। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वैदिक ज्योतिष शास्त्र और लाल किताब के अनुसार ग्रह नक्षत्र हमारे शरीर के अंगों पर प्रभाव डालते हैं। ग्रहों के कारण ही हम रोग ग्रस्त होते हैं और उसी के कारण स्वस्थ भी। जिस तरह चंद्रमा हमारे शरीर के भीतर के जल तत्व और मन को प्रभावित करता है। मंगल खून को संचालित करता है। उसी तरह शनि ग्रह शरीर की हड्डी, नाभि, फेफड़े, बाल, आंखें, कनपटी, भवें, कनपटी, नाखून घुटने, जोड़ों का दर्द, एड़ी, स्नायु, आंत और कफ पर अच्छा और बुरा देता रहता है। यदि हम गहराई से अध्ययन करें तो शनि खासकर हमारी दृष्टि, हड्डी और नाभि पर खास प्रभाव डालता है। यदि हम इन बातों को समझते हैं तो शनि दोष से बचने का प्रयास भी कर सकते हैं।

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1. दृष्टि : इसका अर्थ है कि शनि के दुष्प्रभाव से हमारी आंखें कमजोर हो जाती है। समय पूर्व आंखें कमजोर होने लगती हैं और भवों के बाल झड़ जाते हैं तो समझ लें कि शनि का बुरा प्रभाव है। इसको मजबूत करने के लिए आपको ऐसी चीजें खाना चाहिए जो आखों के लिए उत्तम हो। आंखों की एक्सरसाइज भी करना चाहिए। ठंडे पानी से आंखों को धोते रहना चाहिए और सुरमा लगाते रहना चाहिए।

2. हड्डी : शरीर में हड्डी मजबूत है तो मास मज्जा, स्नायु आदि सभी मजबूत रहेंगे। हड्डियों को मजबूत करने के लिए सरसों के तेल की मालिश करना चाहिए। योगासन करने के साथ ही धूप सेंकना और कैल्शियम और आयरन की चीजें खाना चाहिए। शनि के कारण हड्डियों की समस्या है तो स्नायु तंत्र कमजोर होगा। कई बार शनि के कारण दुर्घटना में हड्डियां टूट जाती हैं तो उसका इलाज लम्बे समय तक चलता है। पक्षाघात के कारण भी यह समस्या हो सकती है। ऐसी दशा में शनिवार शाम को छाया दान करें। हनुमान चालीसा का पाठ करते रहेंगे तो दुर्घटना से बचे रहेंगे।
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3. नाभि : नाभि पर शनि का प्रभाव रहता है। शनि के बुरे प्रभाव के कारण नाभि के या नाभि से रोग उत्पन्न जाते हैं। नाभि को साफ सुथरा रखें और इस पर ठंड है तो सरसों तेल का नहीं तो घी लगाते रहें। नाभि पर सरसों का तेल लगाने से होंठ मुलायम होते हैं। नाभि पर घी लगाने से पेट की अग्नि शांत होती है और कई प्रकार के रोगों में यह लाभदायक होता है। इससे आंखों और बालों को लाभ मिलता है। शरीर में कंपन, घुटने और जोड़ों के दर्द में भी इससे लाभ मिलता है। इससे चेहरे पर कांति बढ़ती है। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से नाभि के संचालन और इसकी चिकित्सा के माध्यम से सभी प्रकार के रोग ठीक किए जा सकते हैं।

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