कोरोना महामारी का संकट पूरे विश्व में है। इस महामारी के चलते कई विकसित देशों की सारी व्यवस्थाएं ठप पड़ चुकी हैं। वहीं अभी तक भारत में स्थिति उन देशों के मुकाबले बेहतर है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को अपने मन की बात कार्यक्रम में चाणक्य नीति का एक श्लोक पढ़ा। उन्होंने इस श्लोक को सेहत के मद्देनजर रखकर पढ़ा था, जो वर्तमान परिस्थिति को देखकर बेहद ही सार्थक श्लोक है। प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित करते हुए कहा-
याद रखिये, हमारे पूर्वजों ने कहा है-
‘अग्नि: शेषम् ऋण: शेषम्, व्याधि: शेषम् तथैवच। पुनः पुनः प्रवर्धेत, तस्मात् शेषम् न कारयेत।।
अर्थात हल्के में लेकर छोड़ दी गई आग, कर्ज और बीमारी, मौका पाते ही दोबारा बढ़कर खतरनाक हो जाती हैं। इसलिए उनका पूरी तरह से इलाज बहुत आवश्यक है।
पीएम मोदी ने कहा, अति उत्साह में, स्थानीय स्तर पर, कही पर भी कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए। दो गज की दूरी, बहुत है जरूरी। अगली मन की बात के समय जब मिलें तब, इस वैश्विक-महामारी से कुछ मुक्ति की खबरें दुनिया भर से आएं, मानव-जाति इन मुसीबतों से बाहर आए– इसी प्रार्थना के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।
चाणक्य नीति में मानव कल्याण के लिए जो बातें लिखी गई हैं। वो भले ही मौर्य काल में लिखी गई हों. लेकिन उन बातों का सार इतना व्यापक है कि वे बातें आज भी सार्थक हैं और समय-समय वे बातें हमारा मार्गदर्शन करती रहती हैं। वास्तव में कोरोनावायरस की वैक्सीन अभी तक नहीं बनी है। ऐसे में सुरक्षा और सामाजिक दूरी ही इसका बचाव है।