पवित्रता का जीवन में बहुत अधिक महत्व होता है। घर ऑफिस में अच्छा वातावरण बनाए रखना जरूरी होता है। सबसे बड़े धार्मिक ग्रंथ श्री रामचरितमानस में भी पवित्रता के महत्व को समझाया गया है। श्री रामचरितमानस में इस बात को बताया गया है कि पवित्रता के लिए स्थान का पवित्र होना जरूरी है।
धार्मिक कथाओं के अनुसार भगवान श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण जी जब वनवास के दौरान वन में विचरण कर रहे थे तब एक स्थान पर लक्ष्मण जी का मन विचलित हो उठा और उनके मन में यह ख्याल आने लगा कि माता कैकेयी ने तो भैया श्री राम को वनवास दिया है मुझे नहीं, मैं क्यों भैया श्री राम के साथ वनवास का कष्ट उठा रहा हूं?
भगवान श्री राम लक्ष्मण जी की भावनाओं को समक्ष गए थे, तभी भगवान श्री राम ने लक्ष्मण जी से बोला कि इस भूमि कि मिट्टी काफी अच्छी दिखती है, थोड़ी सी मिट्टी रख लो। तब लक्ष्मण जी ने उस भूमि की मिट्टी एक पोटली मे रख ली।
रास्ते में विचरण करते-करते जब-जब वो उस मिट्टी की पोटली को अपने से दूर करते उनके मन में किसी भी तरह का कोई सवाल नहीं उठता और मन मे बस माता सीता और श्री राम का ही ध्यान लगा रहता, परंतु जैसे ही वो उस पोटली को अपने पास रखते उनका मन फिर से विचलित हो उठता था।
बार-बार ऐसा होने पर लक्ष्मण जी ने भगवान श्री राम को इस बारें मे बताया, तब श्री राम ने उन्हें बताया की दोष तुम्हारा नहीं हैं। यह प्रभाव उस मिट्टी का जो तुमने पोटली में रखी हुई है।
भगवान श्री राम ने लक्ष्मण जी को बताया कि जैसे कर्म जिस भूमि में किए जाते हैं उसका प्रभाव भी उन्हीं कर्मों के हिसाब से पड़ता है। जिस स्थान की मिट्टी तुमने पोटली में रखी है उस स्थान पर सुंद और उपसुंद नाम के दो राक्षसों का निवास हुआ करता था। उनका निवास होने के कारण वो भूमि भी अपवित्र हो गई और वहां का वातावरण अशुद्ध हो गया। यही कारण है, जिस वजह से तुम्हारा मन बार-बार विचलित हो रहा था।