क्या आपने कभी सोचा है कि साल में 12 महीने, महीने में 31 दिन और हफ्ते में 7 ही दिन क्यों होते हैं। केलैंडर के मुताबिक हम अपने कार्यक्रम जरूर प्लान करते हैं लेकिन आखिर ये शुरू कैसे हुआ। इसी से जुड़े कई रोचक तथ्य हैं।
एक हफ्ते में सात दिन की अवधारणा हमारे सात ग्रहों को लेकर बनाई गई है। पुरानी से पुरानी सभ्यताओं में इन सात ग्रहों को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।
बेबीलोन सभ्यता में भी चंद्रकलाओं से प्रेरणा लेते हुए हफ्ते में सात दिनों की गणना की गई। बेबीलोन सभ्यता के निवासी चंद्रकला बढ़ने से लेकर पूरे चांद के दिन तक सात दिन उत्सव मनाते थे। बाद में उत्सव के यही दिन सप्ताह में बदल गए।
यहूदियों के समय भी यही पैटर्न अपनाया गया और सात ग्रहों के आधार पर सात दिन निर्धारित किए गए।
कैसे रखे गए हैं महीनों के नाम
- फोटो : getty images
जनवरी माह का नाम जानुस (रोमन सभ्यता में उत्पत्ति के देव) के आधार पर रखा गया है। जबकि फरवरी फेबरुसस के सम्मान में रखा गया है। मार्च मार्स के लिए और अप्रैल अफ्रोडाइट के आधार पर रखा गया है।
मई माया के नाम पर जबकि जून जूनों से प्रेरित है। जुलाई का महीना जूलियस सीजर और अगस्त माह आगस्टस सीजर के नाम पर रखा गया है।
सितंबर माह लेटिन भाषा के सेवन शब्द से लिया गया है। अक्तूबर लेटिन के एट से, नवंबर लैटिन भाषा के ही नाइन से और दिसंबर लैटिन भाषा के टैन शब्द से प्रेरित है।
कैसे बना चीनी कलैंडर
- फोटो : getty images
माना जाता है कि चीनी कलैंडर 2637 BCE में बना था। इसमें नाम भी 12 चीनी जोडियाक जानवरों के नाम पर रखे गए हैं। इनमें चूहे, शेर, खरगोश, सांप, ड्रैगन, बैल, घोड़ा, भेड़, बंदर, मुर्गा, कुत्ता और सुअर शामिल हैं। चीनी नए साल पर इस कलैंडर की सबसे लंबी छुट्टी मनाई जाती है।
माना जाता है कि साल में एक बार नियान नाम का दानव बाहर निकलेगा और इंसानों पर हमला करेगा।
अच्छी बात ये है कि वो दानव आग, लाल रंग और धमाकों से डर जाता है। इसीलिए चीनी नए साल पर खूब पटाखे फोड़े जाते हैं, आतिशबाजी होती है और लाल रंग के कपड़े पहने जाते हैं।