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Nag Panchami 2023: आज नागपंचमी पर पूजन से मिल सकती है सर्पदोष से मुक्ति, जानें

Mon, 21 Aug 2023 01:52 PM IST
श्वेता सिंह पं. मनोज कुमार द्विवेदी, ज्योतिषाचार्य

सार

इस दिन गृह-द्वार के दोनों तरफ गाय के गोबर से सर्पाकृति बनाकर अथवा सर्प का चित्र लगाकर सुबह उन्हें जल चढ़ाया जाता है। इसके साथ ही उन पर घी -गुड़ चढ़ाया जाता है। शाम को सूर्यास्त होते ही नाग देवता के नाम पर मंदिरों और घर के कोनों में मिट्टी के कच्चे दिए में गाय का दूध रखा जाता है।
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kaal sarp dosh remedies - फोटो : istock
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विस्तार
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Kaal Sarp dosh Remedies: भगवान शिव के प्रिय श्रावण मास के प्रमुख त्योहारों में से एक नाग पूजन का पर्व नाग पंचमी 21 अगस्त सोमवार को मनाई जाएगी। इस वर्ष सोमवार को नागपंचमी का पर्व होने भगवान शिव की अनंत कृपा बरसेगी । इस शुभ संयोग में काल सर्प दोष से मुक्ति के साथ सुख-समृद्धि की कामना से नाग देवता का दूध से अभिषेक और पूजन करना शुभकारी रहेगा।नागों को अपने जटाजूट तथा गले में धारण करने के कारण ही भगवान शिव को काल का देवता कहा गया है। इस दिन गृह-द्वार के दोनों तरफ गाय के गोबर से सर्पाकृति बनाकर अथवा सर्प का चित्र लगाकर सुबह उन्हें जल चढ़ाया जाता है। इसके साथ ही उन पर घी -गुड़ चढ़ाया जाता है। शाम को सूर्यास्त होते ही नाग देवता के नाम पर मंदिरों और घर के कोनों में मिट्टी के कच्चे दिए में गाय का दूध रखा जाता है। शाम को भी उनकी आरती और पूजा की जाती है। इस दिन शिवजी की आराधना करने से कालसर्प दोष, पितृदोष का आसानी से निवारण होता है। 
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श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। जहां सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को उत्तर भारत में नाग पूजा की जाती है, वहीं दक्षिण भारत में ऐसा ही पर्व कृष्ण पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। हिन्दू धर्म में नाग पंचमी का अत्यंत महत्व माना जाता है। एक मान्यता के अनुसार इस दिन सर्पों के 12 स्वरूपों की पूजा की जाती है। और दूध चढ़ाया जाता है। भगवान शिव को सर्प अत्यंत प्रिय हैं इसीलिए उनके प्रिय माह सावन में नाग पंचमी का त्योहार आता है जिसे श्रद्घा पूर्वक विधि विधान से मनाने पर भोलेनाथ प्रसन्न हो कर अपनी कृपा बरसाते हैं। 
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kaal sarp dosh remedies - फोटो : istock
नागपंचमी की पौराणिक कथाएं 
भविष्य पुराण के अनुसार सावन महीने की पंचमी नाग देवता को समर्पित है।  यही कारण है कि इसे नागपंचमी कहते हैं । पौराणिक कथा के अनुसार सावन महीने की शुक्ल पक्ष पंचमी को भगवान श्री कृष्ण ने वृदांवन में नाग को हराकर लोगों का जीवन बचा लिया था।  श्री कृष्ण भगवान ने सांप के फन पर नृत्य किया, जिसके बाद वह नथैया कहलाए। एक और पौराणिक कथा भी है जिसके अनुसार इस दिन सृष्टि रचयिता ब्रह्रमा जी ने अपनी कृपा से शेषनाग को अलंकृत किया था।  पृथ्वी का भार धारण करने के बाद लोगों ने नाग देवता की पूजा करनी शुरू कर दी, तभी से यह परंपरा चली आ रही है। 
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kaal sarp dosh remedies - फोटो : istock
नागपंचमी पूजन और सर्पदोष से मुक्ति 
मान्यताओं के अनुसार कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष को नागपंचमी के दिन व्रत भी रखा जाता है,व्रत रखने वाले को मिट्टी या आटे के सांप बनाकर उन्हें अलग-अलग रंगो से सजाना चाहिए। सजाने के बाद फूल, खीर, दूध, दीप आदि से उनकी पूजा करें, क्योंकि नाग देवता को पंचम तिथि का स्वामी माना जाता है। पूजा के बाद भुने हुये चने और जौ को प्रसाद के रूप में बांट दें । जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष है उन लोगों को इस दिन नाग देवता की पूजा करनी चाहिए। इस दिन पूजा करने से कुंडली का यह दोष समाप्त होता है। 
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