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केतु के बुरे प्रभाव के कारण असाध्य रोग और कोर्ट-कचहरी का करना पड़ता है सामना, जानें उपाय

Thu, 11 Feb 2021 05:03 PM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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ketu
ज्योतिष में केतु के छाया और पापक ग्रह कहा गया है। इस ग्रह की अशुभ स्थिति के कारण व्यक्ति को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ये ऐसा ग्रह है जिसकी स्थिति खराब होने पर आपको कब अचानक समस्याओं का सामना करना पड़ जाए इसका अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है। केतु एक छाया ग्रह है, इसका अपना कोई वास्तिक अस्तित्व नहीं है ज्योतिष की 12 राशियों में इस ग्रह को किसी राशि का स्वामित्व प्राप्त नहीं है, परंतु फिर भी इस ग्रह की अशुभ स्थिति जातक को भयंकर रूप से बुरी परिस्थितियों में फंसा देती है। इस ग्रह की गलत बैठकी के कारण जातक को असाध्य रोगों का सामना तक करना पड़ता है। तो चलिए जानते हैं कि केतु के कारण क्या समस्याएं होती हैं और इसके क्या उपाय हैं।
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केतु देव - फोटो : अमर उजाला
केतु के कारण होने वाले रोग और समस्याएं
 
केतु ग्रह के अशुभ प्रभाव के कारण गर्भपात, पथरी, गुप्त एवं असाध्य रोग, खांसी, सर्दी, वात और पित्त विकार आदि रोगों के होने की आशंका रहती है।
 
केतु के अशुभ प्रभाव की वजह से जातक के व्यव्हार में अवगुण आने लगते हैं। वह गलत कार्यों की ओर उन्मुख होने लगता है। 
 
केतु ग्रह के अशुभ प्रभाव के कारण जातक मुकदमेबाजी, झगड़े जैसी समस्याओं में फंस जाता है। 
 
केतु की अशुभता के कारण जातक के पिता के साथ मतभेद बढ़ जाते हैं, वैवाहिक जीवन में भी मतभेद आने लगते हैं। परिवार में अशांति बनी रहती है।
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केतु
केतु से बचने के उपाय-
केतु के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए असगंध की जड़ को किसी योग्य पुरोहित द्वारा अभिमंत्रि करवाकर नीले धागे में धारण करना चाहिए। यह कार्य शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार को करना चाहिए। 
 
चंदन की माला को अभिंत्रित करवाकर या किसी के मार्गदर्शन में स्वयं अभिमंत्रित करके किसी माह के शुक्ल पक्ष के पहले मंगलवार को धारण करें। इससे आपको केतु के बुरे प्रभावों से मुक्ति प्राप्त होती है।
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केतु
केतु की अशुभता दूर करने का दान
केतु ग्रह की शांति के लिए तिल, कम्बल, काले वस्त्र, उड़द की काली दाल, लोहा, काली छतरी आदि का वस्तुओं का दान करना चाहिए। इससे केतु की अशुभता से राहत प्राप्त होती है। इसके अलावा केतु से पीड़ित जातकों को म शिव जी की पूजा-अर्चना करनी चाहिए।
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