साताईस नक्षत्रों में आठवां नक्षत्र है पुष्य। इस नक्षत्र को बहुत ही शुभ माना जाता है। इस नक्षत्र के साथ गुरूवार हो तो इसका महत्व और बढ़ जाता है। माना जाता है कि इस नक्षत्र में जो भी शुभ काम किया जाता है उसका अच्छा परिणाम प्राप्त होता है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति उदार, सहनशील और परोपकारी होते हैं। धर्म-कर्म में इनकी गहरी आस्था होती है। लेकिन बचपन में इन्हें काफी संघर्ष करना पड़ता है।
इस नक्षत्र के स्वामी शनि ग्रह हैं और इसके देवता गुरू माने जाते हैं। इन दोनों ग्रहों के प्रभाव के कारण इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति जीवन में खूब तरक्की करते हैं लेकिन इसमें इनकी मेहनत और लगनशीलता का बड़ा योगदान होता है। बचपन में किये गये संघर्ष के कारण कम उम्र में ही दुनियादारी और जीवन के उद्देश्यों को समझ जाते हैं।
इस नक्षत्र का प्रभाव कर्क राशि वालों पर देखा जाता है क्योंकि इसके चारों चरण कर्क राशि में होते हैं। कर्क राशि का स्वामी चन्द्रमा होने के कारण इस नक्षत्र के व्यक्तियों का मन चंचल होता है। घूमना-फिरना इन्हें काफी पसंद होता है। विपरीत लिंग के व्यक्तियों के प्रति इनमें विशेष लगाव होता है। दांपत्य जीवन आमतौर इनका सुखद होता है क्योंकि जीवनसाथी को आदर और सम्मान देते हैं।
आर्थिक मामलों में इनका हाथ सख्त होता है। धन खर्च करने से पहले काफी सोच विचार करते हैं। लेकिन कोई इनके पास मदद की आस लिये आता है तब व्यक्तिगत लाभ कि परवाह किये बिना सहायता करते हैं। सामाजिक कार्यों में इनकी विशेष रूचि होती है।
कमज़ोर और जरूरतमंदों की सहायता में यह सदैव आगे रहते हैं। इनके जीवन में न्याय और सत्य का बड़ा महत्व होता है। इन्हें एक स्थान और एक स्थिति में लंबे समय तक टिके रहना पसंद नहीं होता है। जीवन का तीसरा भाग अधिक सुखमय होता। क्योंकि जवानी में खूब मेहनत करते हैं और धन कमाते हैं।