खेलने कूदने में
बच्चों को अक्सर चोट लग जाती है। बच्चे भले ही उस चोट को थोड़ी देर रोने के बाद भूल
जाएं लेकिन माता-पिता बच्चों के दर्द को लम्बे समय तक महसूस करते रहते हैं। लेकिन
चाह कर भी बच्चों को खेलने कूदने से रोक पाना उनके लिए कठिन होता है।
ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि 12 वर्ष की आयु तक बच्चा चन्द्रमा के प्रभाव
में होता है। चन्द्रमा की स्थिति अनुकूल नहीं होने पर बच्चा अपनी चंचलता के कारण
अक्सर चोट लगा बैठता है।
जिन बच्चों को अक्सर चोट लगती रहती है उनके
माता-पिता को चन्द्रमा से संबंधित उपायों को आजमाना चाहिए। सबसे सरल और आसान तरीका
जो परंपरागत रूप से चली आ रहा है उसमें चांदी के चन्द्रमा का लॉकेट सबसे प्रमुख है।
चांदी के अर्धचन्द्र का लॉकेट बच्चों को पहनाने से स्वास्थ्य सामान्य तौर पर अच्छा
रहता है। चोट एवं दुर्घटना में कमी आती है।
पं. प्रवीण पुरोहित जी कहते हैं
कि चन्द्रमा पहनाते समय एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे की कुण्डली में
चन्द्रमा कहां बैठा है। चन्द्रमा अगर कुंभ से सिंह राशि के बीच किसी भी राशि में
बैठा है तो अर्ध चन्द्रमा ऊपर की ओर होना चाहिए। कन्या से मकर राशि के बीच चन्द्रमा
है तो चन्द्रमा नीचे की ओर रखना चाहिए।
चन्द्रमा पहनाने के साथ एक उपाय भी
करें कि चन्द्रमा जिस नक्षत्र में बैठा है, उसके स्वामी का जप अथवा अन्य कोई उपाय
करवायें। इससे बाल्य काल में कष्ट एवं संकट से बचाव होता है। चन्द्रमा के अलावा
तांबे अथवा सोने का बना हुआ सूर्य का लॉकेट भी बच्चों के स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद
होता है। चन्द्रमा के साथ सूर्य पहनाना हो तो लाल धागे में लॉकेट लगाकर बच्चे को
पहनाएं। सिर्फ चन्द्रमा पहनाना हो तो काले धागे अथवा सफेद चमकीले धागे में लॉकेट
लगाकर बच्चे को पहनाएं।