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पी चिदंबरम पर छाया राहु का साया, आने वाला समय कठिन

Fri, 27 Sep 2013 12:37 PM IST
पण्डित गोविंद शास्त्री /अमर उजाला, दिल्ली
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वर्तमान समय में राज कर रही यूपीए सरकार को सुरक्षित रखने में सफल रहने वाले वित्तमंत्री पी चिदंबरम के जन्म के समय (15 सितंबर 1945, समय दोपहर 11.47 बजे, स्थान कराईकुडी-तमिलनाडु) पूर्वाषाढा नक्षत्र, बृश्चिक लग्न, सौभाग्य योग और अभिजीत मुहूर्त था।
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वृश्चिक लग्न की कुंडली के द्वितीय भाव में चंद्र और केतु, अष्टम में मंगल, शनि एवं राहू तथा नवम भाग्यभाव में शुक्र  हैं, जबकि दशम में सूर्य-बुध, और एकादश में गुरु बैठे हैं। कुंडली में शुभाशुभ मिलाकर 111 से भी अधिक योग बने हैं। 24 वें वर्ष से भाग्योदय का लाभ लेने वाले पी चिदंबरम को कामयाबी विरासत में मिली पिताभाव में बैठे सूर्य और बुध ने इन्हें पिता की तरफ से पूर्ण सुख-सहयोग प्रदान किया।

इन्हीं सूर्य, बुध और बृहस्पति ने इन्हें कुशल वक्ता, प्रशासक एवं अर्थशास्त्री भी बनाया। इनके जीवन में पहला बड़ा चमत्कार पंचमेश गुरु की अंतर्दशा में सन् 1985 में हुआ जब ये पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए और राजीव गांधी सरकार में कार्मिक मंत्री बने।
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अब तक इन्होंने कई राजनैतिक यात्राएं की किन्तु अंतिम पड़ाव कांग्रेस पार्टी ही रही। इनके जीवन में सबसे अहम परिवर्तन या विकास बृहस्पति की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा जून 2008 से फरवरी 2011 तक और फिर उसके बाद क्रमशः सूर्य और चन्द्र की अंतर्दशा में हुआ। इस समय यह भारत के गृहमंत्री रहे तब आतंकवाद एवं नक्सलवाद खत्म करने के लिए कई कड़े फैसले लिए, जिसका विरोध भी सहना पड़ा।

मौजूदा सरकार में सर्वाधिक प्रभावशाली व्यक्तित्व एवं संकटमोचक के रूप में पहचान बनाने वाले पी चिदंबरम जुलाई 2012 में फिर वित्तमंत्री बने। वह अब तक देश के लिए सात बजट प्रस्तुत कर चुके है। इनपर मार्च 2014 से बृहस्पति की महादशा में राहू की अंतर्दशा चल रही है। राहू उच्चराशिगत अष्टम भाव में बैठे हैं अतः आने वाला समय इनके लिए स्वास्थ्य एवं गरिमा की दृष्टि से कठिन चुनौतियों लाने वाला है।
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