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Holashtak 2022: कल से होलाष्टक आरंभ, इस दौरान ये कार्य होते हैं वर्जित

Wed, 09 Mar 2022 05:16 PM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली

सार

Holashtak 2022: फाल्गुन अष्टमी से होलिका दहन तक आठ दिनों तक होलाष्टक के दौरान मांगलिक और शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है। हालांकि इन आठ दिनों तक कोई शुभ कार्य नहीं किए जाते लेकिन देवी देवता की आराधना क लिए यह बहुत ही शुभकारी दिन माने जाते हैं।
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Holashtak 2022: फाल्गुन अष्टमी से होलिका दहन तक आठ दिनों तक होलाष्टक के दौरान मांगलिक और शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है। - फोटो : istock
Holashtak 2022: 1 हिंदू धर्म में होली के पर्व का विशेष महत्व है। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होली का पर्व मनाया जाता है। लेकिन फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से ही होलाष्टक लग जाता है। फाल्गुन अष्टमी से होलिका दहन तक आठ दिनों तक होलाष्टक के दौरान मांगलिक और शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है। होलिका पूजन करने के लिए होली से आठ दिन पूर्व होलिका दहन वाले स्थान को गंगाजल से शुद्ध कर उसमें सूखी लकड़ी, उपले व होलिका दहन के लिए दो डंडे स्थापित किए जाते है। एक डंडे को प्रह्लाद एवं दूसरे डंडे को उनकी बुआ होलिका माना जाता है। इसी दिन को होलाष्टक प्रारम्भ का दिन माना जाता है। इस वर्ष होलाष्टक कल से यानी 10 मार्च, गुरुवार से आरंभ होकर 17 मार्च, गुरुवार तक रहेंगे। हालांकि इन 8 दिनों तक कोई शुभ कार्य नहीं किए जाते लेकिन देवी देवता की आराधना के लिए यह बहुत ही शुभ दिन माने जाते हैं। हालांकि इन आठ दिनों तक कोई शुभ कार्य नहीं किए जाते लेकिन देवी देवता की आराधना क लिए यह बहुत ही शुभकारी दिन माने जाते हैं। आइए जानते हैं कब से लग रहा होलाष्टक और इस दौरान किन कार्यों को करने की होती है मनाही। 

 
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Holashtak 2022: इस दौरान किसी भी शुभ कार्य को करना अपशकुन होता है। - फोटो : istock
कब लगेगा होलाष्टक
होलाष्टक 10 मार्च 2022, गुरुवार से लेकर 17 मार्च 2022, गुरुवार तक रहेगा। मान्यता है कि इस दौरान किसी भी शुभ कार्य को करना अपशकुन होता है। होलाष्टक से होली और होलिका दहन की तैयारी शुरु हो जाती है। 

 
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Holashtak 2022:होलाष्टक के आठ दिनों को शुभ कार्य नहीं करने के पीछे पौराणिक कथा है। - फोटो : amar ujala
होलाष्टक में क्यों नहीं होते शुभ कार्य
होलाष्टक के आठ दिनों को शुभ कार्य नहीं करने के पीछे पौराणिक कथा है जिसके अनुसार कामदेव द्वारा भगवान शिव की तपस्या भंग करने के कारण फाल्गुन शुक्ल अष्टमी तिथि पर क्रोध में आकर कामदेव को भस्म कर दिया था। अन्य कथा के अनुसार राजा हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका के साथ मिलकर पाने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति से दूर करने के लिए इन आठ दिनों में कठिन यातनाएं दी थीं।  इसलिए होलाष्टक काल को विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन समारोह आदि जैसे शुभ कार्यों को करने के लिए अशुभ माना जाता है। 

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Holashtak 2022: होलाष्टक लगते ही हिंदू धर्म से जुड़े सोलह संस्कार समेत कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। - फोटो : amar ujala
होलाष्टक पर न करें ये कार्य 
फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक लग जाता है।  होलाष्टक लगते ही हिंदू धर्म से जुड़े सोलह संस्कार समेत कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।  चाहे कोई नया घर खरीदना हो या कोई नया व्यवसाय शुरू करना हो सभी शुभ कार्य रोक दिये जाते हैं। यदि इस दौरान किसी की मृत्यु हो जाती है तो उनके अंतिम संस्कार के लिए भी शांति कराई जाती है। एक मान्यता अनुसार किसी भी नविवाहिता को अपने ससुराल की पहली होली नहीं देखनी चाहिए। 
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Holashtak 2022: यह समय भगवान की भक्ति के लिए भी उत्तम माना जाता है। - फोटो : amar ujala
होलाष्टक पर करें ईश आराधना 
एक तरफ होलाष्टक में 16 संस्कार समेत कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है, वहीं यह समय भगवान की भक्ति के लिए भी उत्तम माना जाता है। होलाष्टक के दौरान दान-पुण्य करने का विशेष फल प्राप्त होता है। इस दौरान मनुष्य को अधिक से अधिक भगवत भजन और वैदिक अनुष्ठान करने चाहिए, ताकि समस्त कष्टों से मुक्ति मिल सके। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक में महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से हर तरह के रोग से छुटकारा मिलता है और सेहत अच्छी रहती है। 
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