मूर्खा यत्र न पूज्यन्ते धान्यं यत्र सुसञ्चितम्।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
दम्पत्येः कलहो नाऽस्ति तत्र श्रीः स्वयमागता ।।
Tips To Get Blessings Of Goddess Laxmi: आचार्य चाणक्य को कौटिल्य और विष्णु गुप्त के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने एक महान ग्रंथ की रचना की है, जिसे चाणक्य नीति के नाम से जाना जाता है। इस नीति शास्त्र में राजनीति, युद्ध और जीवन से जुड़े सभी पहलुओं का उल्लेख है, जिनका अध्ययन करने से जीवन की सही दिशा का ज्ञान होता है। आचार्य चाणक्य को न केवल सलाहकार बल्कि एक अच्छे शिक्षक के रूप में भी जाना जाता है। उन्हें किताबी ज्ञान के साथ-साथ अच्छी और बुरी सभी तरह की परिस्थितियों का अनुभव था। वहीं चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में उस घर का वर्णन भी किया है, जहां हमेशा लक्ष्मी जी का वास होता है। साथ ही उस घर के लोगों को कभी धन हानि का सामना भी नहीं करना पड़ता है। आइए उस घर के बारे में विस्तार से जान लेते हैं।
मूर्खा यत्र न पूज्यन्ते धान्यं यत्र सुसञ्चितम्।
दम्पत्येः कलहो नाऽस्ति तत्र श्रीः स्वयमागता ।।
चाणक्य के इस श्लोक का अर्थ है कि जिस घर में मूर्ख लोगों की बजाय गुणवानों का आदर-सम्मान किया जाता है, वहां संपत्ति अपने-आप बढ़ने लगती हैं। दरअसल, कुछ घरों में हमेशा लड़ाई-झगड़ा बना रहता है। जिसके चलते व्यक्ति तनाव से घिरा रहता है, जिससे कार्य प्रभावित होते हैं। घर के कलह के कारण परिवार में भी नकारात्मकता बनी रहती है।
चाणक्य के अनुसार ऐसे घरों में कभी भी बरकत नहीं होती है। वहां हमेशा आर्थिक तंगी बनी रहती है। इसलिए घर में हमेशा सकारात्मक वातावरण रखाना चाहिए। ऐसे परिवार में धन की देवी मां लक्ष्मी स्वयं आकर निवास करने लगती है।
चाणक्य नीति के अनुसार जिस घर में अन्न का सम्मान किया जाता है, वहां सदैव मां लक्ष्मी वास करती है। साथ ही परिवार में खुशियों का वास होता है। वहीं जिन घरों में अन्न की बर्बादी की जाती है, और कई कई दिन का खाना काफी मात्रा में इकट्ठे करके रखा जाता है, वहां मां लक्ष्मी के साथ-साथ अन्नपूर्णा देवी भी वास नहीं करती हैं। इसलिए इंसान को अन्न की बर्बादी नहीं करनी चाहिए।
आचार्य चाणक्य के अनुसार जिस घर में हर बात पर पति-पत्नी झगड़ते हैं, वहां हमेशा नकारात्मकता बनी रहती है। साथ ही दरिद्रता का वास होता है। चाणक्य का मानना है कि जिन घरों में शांति का वातावरण होता है, वहां हमेशा लक्ष्मी माता पधारती हैं। साथ ही वहां पर रहने वाले लोग तनाव से भी मुक्त रहते हैं। इसलिए हमेशा रिश्तों का सम्मान करना चाहिए।