धान में बकानी रोग नहीं आएगा। रोपाई विधि की बजाय सीधी बिजाई करने पर फसल दस दिन पहले पकेगी। अगली फसल समय पर लगाई जा सकेगी। सूखे की स्थिति में 15 जुलाई तक इस विधि को अपना सकते हैं। कम अवधि में पकने वाली किस्में ही इस तरीके से लगाएं।
यह है डीएसआर का तरीका
वैज्ञानिकों ने बताया कि डीएसआर (सीधी बिजाई) विधि से प्रति एकड़ आठ से दस किलो प्रति एकड़ धान का बीज लगता है। बिना जुताई तपड़ खेत में जीरो ड्रिल मशीन से जिसमें इन्क्लाइट प्लेट होती है, उससे बिजाई करें। कंप्यूटर लेवलर से खेत समतल करके शून्य नमी में बिजाई कर सकते हैं तथा दूसरे तरीके से खेत में पहले पानी लगाकर फिर बत्तर आने पर।
बीज की गहराई दो से तीन सेंटीमीटर तक रखें। बिजाई के बाद पहले सात दिन तक हर तीसरे दिन पानी दें, जब तक पूरे बीज का जमाव ना हो जाए। फिर हर सात दिन पर सिंचित करें। जमीन में हेयर क्रेक आएं तभी सिंचाई करें। इस समय कम अवधि वाली किस्मों में पूसा बासमती-1509 व पीआर ग्रुप की 126, 124 व 127 किस्में अपना सकते हैं। यह पकने में 115 से 120 दिन का समय लेंगी।
तीन राज्यों में रकबा व उत्पादन
देश में वर्ष 2018 में धान का रकबा 43 मिलियन हेक्टेयर था। जिसमें करीब 111 मिलियन टन धान उत्पादन हुआ। इसमें से करीब 10.5 मिलियन टन चावल निर्यात होता है। जोकि ईरान, सउदी अरब, ईराक, कुवैत, यमन, यूके, यूएस व अमन आदि देशों में भेजा जाता है।
हरियाणा में वर्ष 2018 में धान का रकबा 1.19 मिलियन हेक्टेयर व उत्पादन 3.84 टन था। पंजाब में 2.75 मिलियन हेक्टेयर व उत्पादन 11 मिलियन टन था। पश्चिम उत्तर प्रदेश में रकबा 1.53 मिलियन हेक्टेयर व उत्पादन 3.8 मिलियन टन था। कुल चावल उत्पादन में इन तीनों राज्यों का करीब 18 मिलियन टन का योगदान रहा।