बागवानी विशेषज्ञों ने बर्फबारी के बाद बगीचों के प्रबंधन में जल्दबाजी न करने की सलाह दी है। बगीचों में बर्फ पिघलने तक बागवान इंतजार करें। बागवान बगीचों के तौलियों में कीचड़ रहते खाद न डालें। बगीचों में नमी रहते ही प्रबंधन में जुटें ताकि समय रहते फलदार पेड़ों को बचाया जा सके।
प्रदेश में हर साल सेब से का चार हजार करोड़ का कारोबार होता है। सेब के पेड़ों के लिए कड़ाके की ठंड और बर्फबारी खाद का काम करती है। जितनी ठंड पड़ती है, उतनी सेब की फसल अच्छी होने की उम्मीद रहती है। सेब के पेड़ों का प्रबंधन भी जनवरी और फरवरी के मध्य करना पड़ता है। जनवरी में पड़ी बर्फ को सेब के पेड़ों के लिए अच्छा माना जाता है।
बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज ने बताया कि जनवरी और फरवरी की बर्फबारी सेब के बगीचों के लिए अच्छी रहती है। बगीचों में बर्फ धीरे- धीरे पिघलने से लंबे समय तक नमी बनी रहती है। बागवानों को बर्फबारी के बाद थोड़ा इंतजार करना होगा। बर्फ पिघलने के बाद बगीचों में नमी के रहते ही खाद डालें। बगीचों में कीचड़ रहते खाद डालने से नुकसान ही होगा।