किसान रत्न से सम्मानित होने वाले कुरुक्षेत्र के मंगोली जाटान निवासी कुलबीर सिंह के मुताबिक उनके पिता के पास पांच एकड़ जमीन थी, जिस पर वह परंपरागत ढंग से खेती करते थे। मगर उसकी खेती के बजाय मधुमक्खी पालन में रुचि थी। एमए करने के बाद उसने मधुमक्खी पालन शुरू कर दिया। वह पहला किसान था, जिसने ग्राफ्टिंग तकनीक की मदद से रानी मधुमक्खी तैयार की और उसे बेचा।
इसके बाद उसे डेयरी व्यवसाय शुरू किया। शुरू में उसके पास पांच गाय थी, लेकिन आज उसके पास 60 गायें हैं। वह खुद दूध प्रोडक्ट जैसे लस्सी, पनीर व देसी घी बनाकर बेचता है। यही नहीं जब उसे पशुओं के चारे की जरूरत पड़ी तो मजबूरन उसे खेती भी करनी पड़ी। यहां भी उसने मिश्रित खेती की, जैसे वह गन्ने की फसल के साथ प्याज व फूलगोभी की फसल लेता है। करेले के साथ टमाटर की फसल लेता है। कुलबीर सिंह का कहना है कि अगर परंपरागत खेती से हटकर खेती की जाए तो खेती कभी घाटे का सौदा नहीं बनेगी।
इस दौरान निर्मल सिंह (यमुनानगर), सुरेश कुमार एवं सिमरजीत कौर (फतेहाबाद), जैत कुमार एवं शमशेर सिंह संधू (सिरसा), संदीप व अनीता (रोहतक), सुरेश गोयल व राम भगत (हिसार), बीजन सिंह रावत (पलवल), ऋषिराम एवं रीना देवी (जींद), महिंद्र सिंह (कैथल), रोहित कुमार (अंबाला), किशन लाल (महेंद्रगढ़), हाकम सिंह (पंचकूला), महेश कुमार (सोनीपत), मुकेश कुमार एवं रजनी (फरीदाबाद), रामप्रसाद (बावल), विकास चौधरी (करनाल), धर्मबीर एवं गोमती देवी (झज्जर) और विकास फौगाट (भिवानी) को भी सम्मानित किया गया।