जियो के सहारे रिलायंस का 'प्राइस वार'

रिलायंस की ओर से नए मोबाइल नेटवर्क जियो को बाजार में उतारने के बाद दूरसंचार कंपनियों के बीच नए ग्राहकों को पाने की लडाई तेज होने की संभावना है। जियो ने तेज स्पीड की 4जी मोबाइल सेवा और एलटीई यानी लांग टर्म इवोल्यूशन इंटरनेट शुरू करने की पेशकश की है।
4जी मोबाइल इंटरनेट सेवा देने वाली पहली कंपनी रिलायंस नहीं है, दूसरी कई कंपनियां काफी पहले से इस मैदान में हैं। लेकिन जियो ने अपने प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले काफी कम दर पर यह सेवा देने का फैसला किया है। असली संकट की वजह इसकी कीमतें हैं। रिलायंस की कोशिश ज्यादा से ज्यादा लोगों के हाथों में मोबाइल हैंडसेट थमा देने की है।
इसकी योजना 50 डॉलर यानी 35 सौ रुपए से भी कम कीमत में हैंडसेट लोगों को मुहैया कराने की है। कंपनी का नेटवर्क तकरीबन 18,000 नगरों-कस्बों और दो लाख गांवों तक फैला हुआ है। रिलायंस की योजना साल भर में देश के 90 फीसद लोगों तक अपनी पंहुच बनाने की है।
यह योजना कुछ ज्यादा ही महत्वाकांक्षी लगती है। पर इसके पीछ देश की सबसे बडी निजी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज है। इसके अध्यक्ष मुकेश अंबानी ने कंपनी की सालाना आम बैठक में इसका एलान किया। हालांकि कंपनी ने इस तरह की सेवा शुरू करने का विचार 2010 में ही किया था।
इस तरह यह छह साल की देर से शुरू हो रही है। मुकेश अंबानी देश के सबसे धनी व्यक्ति हैं। अगर वो अपना सारा संसाधन इसके पीछे झोंक दें तो छोटी कंपनियों के लिए दिक्कत होना लाजिमी है। अंबानी ने ज्यों ही 4जी सेवा का एलान किया, देश की सबसे बडी दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल के शेयरों की कीमत 8.50 फीसद टूटी। इससे निवेशकों को 1।30 अरब डॉलर का नुकसान हुआ।
आइडिया सेल्यूलर के शेयरों की कीमत में 7 फीसद की कमी दर्ज की गई

दूसरी दूरसंचार कंपनी आइडिया सेल्यूलर के शेयरों की कीमत में 7 फीसद की कमी दर्ज की गई। इससे निवेशकों को 50 करोड डॉलर का चूना लगा। हालांकि दिन का कारोबार खत्म होते समय रिलायंस के शेयरों की कीमत भी तीन फीसद गिरी। कंपनी ने 4जी सेवा शुरू करने का एलान करते हुए बडे राष्ट्रीय अखबारों में पूरे पेज का विज्ञापन दिया।
इसमें प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया। स्वाभाविक है आलोचकों ने व्यावसायिक प्रतिस्पर्द्धा को गलत ढंग से प्रभावित करने का आरोप लगाया। इसे ऐसे समझा जा सकता है। भारत की दूरसंचार कंपनियों की कमाई का बडा जरिया डेटा नहीं, वॉयस कॉल है। और रिलयांस ने मुफ्त वॉयस कॉल की पेशकश कर दी है। इससे दूसरी कंपनियों को नुकसान तो होगा ही। दूसरी बातें भी हैं।
भारत में ज्यादातर लोग इंटरनेट के लिए फोन का इस्तेमाल करते हैं। दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) का अनुमान है कि देश के 15 करोड से भी अधिक ब्रॉडबैंड उपभोक्ताओं का कम से कम 90 फीसदी मोबाइल के जरिए इंटरनेट का इस्तेमाल करता है। इसलिए, दूरसंचार कंपनियों की कमाई का अगला जरिया डेटा पैक है।
लेकिन रिलायंस जियो का सबसे सस्ता प्लान दो डॉलर यानी करीब 130 रुपए प्रतिमाह है। उसे डेटा, वॉयस, वीडियो और तमाम दूसरी सेवाओं के लिए अलग से पैसे नहीं देने होंगे। कुछ लोगों ने इस पर चिंता जताई है।
ग्रेहाउंड रिसर्च के संचित गोगिया को इस बात की चिंता है कि इससे रिलायंस का बाजार पर एकाधिकार हो जाएगा। उन्होंने कहा, "एक व्यवसायिक घराने का स्टार्ट अप, कंटेट, वीएएस, टेलीफोन, मोबाइल, ब्रॉडबैंड यानी सभी सेवाओं पर नियंत्रण हो जाएगा।इससे मुझे चिंता होती है और नियामकों को भी होनी चाहिए।
रिलायंस दूरसंचार बाजार में ऐसे समय दाखिल हो रहा है

रिलायंस दूरसंचार बाजार में ऐसे समय दाखिल हो रहा है, जब इस उद्योग पर कुल मिला कर 50 अरब डॉलर का कर्ज है। वो कहते हैं कि भारत एक खुला बाजार है, यहां कीमतों के स्वाभाविक स्तर पर पंहुचने के लिए तीन से पांच कंपनियों का बाजार में होना जरूरी है।
दिल्ली में रहने वाली शिल्पा धींगडा एक ऐसा मोबाइल हैंडसेट खरीदना चाहती हैं, जो 4जी सेवा के अनुकूल हो। उन्होंने कहा, "मैं व्हॉट्सऐप, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट और फेसबुक का दिन भर इस्तेमाल करती रहती हूं।
इसलिए सस्ता इंटरनेट मेरे लिए अच्छा है।" राजधानी दिल्ली में रिलायंस की दुकानों के आगे लंबी कतारें लगी हुई हैं। सिम कार्ड तो मुफ्त मिल रहे हैं। पर वह काम करे, इसके लिए 4जी वोल्ट (वीओएलटीई) को सपोर्ट करने वाले हैंडसेट की जरूरत है। आईटी पेशेवर अतुल मोहन थोडा चिंतित हैं। वो अलग-अलग योजनाओं को देख रहे हैं।
वो कहते हैं, "सिर्फ विज्ञापन देखकर हम अपना दूरसंचार ऑपरेटर नहीं बदल देंगे।" वो दूससंचार ऑपरेटर बदलने के पहले नेटवर्क की क्वालिटी देख लेना चाहते हैं। पर ऑपरेटर परेशान हैं। मौजूदा कंपनियों ने जिओ पर व्यापार के अनुचित तौर-तरीके अपनाने का आरोप लगाया है।
रिलायंस ने पलटवार करते हुए कहा है कि ये कंपनियां गलत तरीके से रुकावटें डालती रही हैं। मुकेश अंबानी का कहना है कि सिर्फ एक हफ्ते में दो अलग-अलग नेटवर्क के बीच जाने वाले पांच करोड कॉल नाकाम रहे हैं।
जिओ में तकरीबन 20 अरब डॉलर का निवेश किया गया है। यह अपने तरह का सबसे बडा वेंचर है। इस देश में अभी भी इंटरनेट की स्पीड निहायत ही धीमी है और कॉल ड्रॉप रोजमर्रा की बात है। इसलिए सस्ती दरों पर शुरू में ग्राहक तो आसानी से मिल जाएंगे, पर इन समस्याओं का निपटारा करने के बाद ही ये ग्राहक बने रहेंगे।